थाना निघासन क्षेत्र में मुठभेड़ में मार गिराए गए जिले के कुख्यात अपराधी एक लाख के इनामी बग्गा सिंह का गुरुवार को तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। बग्गा के सीने में दो गोलियां लगीं हैं, जो उसके सीने को पार कर गई हैं।
सिपाही की हत्या कर साथी के साथ 10 सितंबर 2013 को कचहरी से फरार होने के बाद थाना सिंगाही के गांव माझा निवासी बग्गा सिंह अपराध जगत का बेताज बादशाह बन गया था। उसके सिर्फ नाम से ही जिले के अलावा आसपास के जिलों के लोग भी कांप उठते थे। जिले की पुलिस ने उसे पकड़ने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन वह उसे गिरफ्तार करने में कामयाब नहीं हुई। पुलिस ने उस पर पांच हजार से इनाम शुरू किया, जो कई टुकड़ों में बढ़ाकर एक लाख रुपये तक पहुंच गया। यूपी एसटीएफ की टीम भी बग्गा सिंह की तलाश में लगाई गई थी। एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम शाह के नेतृत्व में बुधवार की सुबह एसटीएफ टीम ने थाना निघासन क्षेत्र में दुलही पुरवा साइफन के पास बग्गा सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया था।
बुधवार की आधी रात शव जिला मुख्यालय पहुंचा। गुरुवार को खीरी पुलिस के एएसपी घनश्याम चौरसिया भी पुलिस फोर्स के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां यूपी एसटीएफ के एएसपी भी अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन डॉक्टरों के पैनल ने गुरुवार की दोपहर करीब एक बजे शव का पोस्टमार्टम शुरू किया, जो करीब सवा घंटे तक चला। पोस्टमार्टम की पुलिस ने वीडियोग्राफी भी कराई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके सीने में दो गोलियां लगने की पुष्टि हुई हैं। दोनों गोलियां सीने के आरपार हैं। एएसपी घनश्याम चौरसिया ने बताया कि पैनल में डॉ. राजकुमार वर्मा, डॉ. राम विलय और डॉ. एसके नायक शामिल थे।
नायब तहसीलदार ने भरा पंचनामा
निघासन क्षेत्र के दुलही पुरवा साइफन के पास मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी बग्गा सिंह का शव परिवार वालों और रिश्तेदारों के इंतजार में शाम तक सीएचसी निघासन में पड़ा रहा। यूपी एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि घरवालों और रिश्तेदारों में से किसी के न पहुंचने पर नायब तहसीलदार निघासन ज्ञान प्रकाश की मौजूदगी में रात 08:45 बजे पंचायतनामा भरा गया। इसके बाद रात करीब 09:30 बजे शव जिला मुख्यालय के लिए भेजा जा सका।
दो कारतूस, पर्स, एटीएम आदि सामान मिला
नायब तहसीलदार ज्ञान प्रकाश ने बताया कि पंचायतनामा भरने के दौरान मृतक बग्गा के कपड़ों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसकी जेब से दो जीवित .32 बोर के कारतूस, एक मोबाइल, रोलेक्स की कलाई घड़ी और पीले रंग का पर्स बरामद हुआ। पर्स में 13 रुपये 50 पैसे खुदरा और 1515 रुपये बरामद हुए। इसके अलावा एक एचडीएफसी बैंक का एटीएम, मोबाइल बैट्री और तंबाकू की डिब्बी बरामद हुई।
पहले ही एनकाउंटर में मारा गया दुर्दांत बग्गा
लखीमपुर खीरी।
अपने पुलिस सेवा के कार्यकाल में पहला एनकाउंटर करने वाले यूपी एसटीएफ के एएसी विशाल विक्रम चार माह पहले ही सीओ से प्रमोशन पाकर एसटीएफ में एएसपी बने हैं। कई जिलों में सीओ सिटी पद पर रहने वाले विशाल विक्रम ने कई शातिर अपराधियों से लोहा लिया, लेकिन उनके जीवन की यह पहली मुठभेड़ की, जिसमें उन्होंने एक लाख रुपये के इनामी शातिर अपराधी बग्गा को मार गिराया। हालांकि वह इसका श्रेय पूरी टीम को देते हैं।
सीओ से प्रमोशन पाकर 2001 बैच के करीब चार महीने पहले यूपी एसटीएफ के एएसपी बने विशाल विक्रम ने बताया कि वह बागपत, मेरठ, सीतापुर, सहारनपुर, बाराबंकी में सीओ सिटी रह चुके हैं। शासन ने चार महीने पहले प्रमोशन देकर उन्हें यूपी एसटीएफ का एएसपी नियुक्ति किया था। एसटीएफ में आने के बाद उन्होंने करीब एक महीने ऑपरेशन बग्गा की रणनीति बनाई। इस पर काम शुरू किया। तीन महीने पहले दो टीमें बनाईं। दोनों टीमें खीरी और नेपाल बार्डर पर आती-जाती रहीं। इस दौरान कई-कई दिनों तक टीमें जिले में और नेपाल बार्डर पर रहीं। वह खुद अब तक चार-पांच बार आ चुके हैं। ऑपरेशन बग्गा में बार्डर पर सक्रिय इंटलीजेंस की भी काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि यह पुलिस सेवा का उनका पहला एनकाउंटर है। इससे पहले उन्होंने बाराबंकी में सीओ सिटी पद पर रहते हुए एक चंदन सिंह नामक कुख्यात अपराधी को दबोचा था।
दहलाने वाली वारदातें करने वाला था बग्गा
लखीमपुर खीरी।
यूपी एसटीएफ टीम का दावा है कि बग्गा सिंह ने जिले में ऐसी दो बड़ी वारदातों को अंजाम देने का प्लान तैयार किया था, जिससे पूरा जिला दहल उठता। सही समय से हुई मुठभेड़ में बग्गा मारा गया। यूपी एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम ने बताया कि सचिन उर्फ डालू गुप्ता के एनकाउंटर के बाद बग्गा नेपाल चला गया था। नेपाल में रहकर भी वह अपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहा था। करीब 15 दिन पहले इनपुट मिला था कि हाल ही में बग्गा सिंह ने जिले में एक अपहरण और एक हत्या की वारदात करने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि वह इन्हीं वारदातों को करने की फिराक में था। यह तो शुक्र है भगवान का कि वह मुठभेड़ में मारा गया। वरना दोनों घटनाओं से जिला दहल उठता।
काफी तेज दिमाग का था बग्गा सिंह
यूपी एसटीएफ के एएसपी बताते हैं कि कुख्यात अपराधी काफी शातिर दिमाग था। शायद यही वजह रही कि टीम को तीन महीने का समय लग गया। उनका इरादा उसका एनकाउंटर करने का नहीं था, लेकिन जब देखा कि वह टीम पर सीधी गोलियां चला रहा है, तब टीम ने और कोई रास्ता न देख उस पर गोलियां बरसाईं, जिसमें वह मारा गया।
टीम पर चलाई थीं करीब 15 राउंड गोलियां
यूपी एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम ने बताया कि जब बग्गा की घेराबंदी की गई और टीम ने उसे ललकारा तो बग्गा ने पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस पर टीम के कमांडों समेत अन्य जवानों ने पोजीशन लेकर चार राउंड गोलियां दागीं, जिससे बग्गा मारा गया। बग्गा के बरामद .32 बोर के पिस्टल की मैगजीन में चार और चैंबर में एक कारतूस थी।