लखीमपुर खीरी/ निघासन।
कस्बे में बैंक के पास स्थित एक होटल पर खड़ी बालिका से अपनापन दिखाते हुए एक महिला उसकी गोद से चार माह की बच्ची को लेकर फरार हो गई। महिला ने चार माह की बच्ची को गोद में लेते हुए बालिका से जलेबी लाने को कहा था। बालिका लौटी तो महिला बच्ची को लेकर भाग चुकी थी। पुलिस ने पीड़ित मां की तहरीर पर अज्ञात महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसको काफी ढूंढा, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।
थानाक्षेत्र के गांव दीदारू टांडा निवासी अशरफी बानो पत्नी दिलबर ने बताया कि उसका पति बिहार में मजदूरी करने गया है। उसके दो बेटे दिलशाद (10) और शमशाद (5) हैं। उसने चार माह पहले एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम उसने मौसमी रखा। परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण पति की सलाह पर गुरुवार को वह सीएचसी में आशा बहू के साथ नसबंदी कराने आई थी। उसके साथ बहन की पुत्री अंजुम (11) निवासी नौगवां भी थी। अशरफी ने भांजी को चार माह की बच्ची को देते हुए जलेबी लाकर खाने को कहा और खुद अस्पताल में चली गई। अंजुम, मौसमी को गोद में लेकर जलेबी लेने के लिए चली गई, तभी सिंगाही रोड स्थित लखनऊ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के पास उसे एक महिला मिली। महिला ने अंजुम को बताया कि वह गड्डीपुरवा में रहती है और उसकी मौसी को जानती है। यह कहकर उसने बच्ची को अंजुम की गोद से ले लिया और कहा कि तुम जलेबी ले आओ। अंजुम जब जलेबी लेकर लौटी तो वह औरत गायब थी।
अंजुम रोती हुई अस्पताल में पहुंची और अपनी मौसी को घटना से अवगत कराया। घटना के बावत जानकारी होने पर अस्पताल में मौजूद लोग सकते में आ गए। मौजूद लोगों ने महिला की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। इसके बाद अशरफी बानो ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।
दरोगा राकेश सिंह फोर्स सहित सीएचसी पहुंचे और मामले की पूछताछ की। इस दौरान अंजुम ने बताया कि महिला ने हरे रंग की साड़ी पहन रखी थी। पुलिस ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर अज्ञात महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
बदहवाश होकर बेटी के
लिए तड़प रही थी मां
मां अशरफी बानो दहाड़ मारकर रो रही थी। वह एक ही बात कह रही थी कि उसकी बेटी को कोई उसे दिलवा दे। वह तड़पती हुई लोगों को उसके गरम कपड़े दिखाते हुए करूण रुदन कर रही थी। उसकी बहन की बेटी अंजुम का भी रो रोकर बुरा हाल था।
पहली बार हुई घटना
बच्ची को झांसा देकर ले जाने की पहली बार हुई घटना से सभी लोग सकते में हैं। समाजसेवी ऊषा दीक्षित ने इस घटना की निंदा करते हुए बच्ची को दिलाने की मांग पुलिस के आला अफसरों से की है। उन्होंने महिलाओं की असुरक्षा पर भी कई सवाल उठाए हैं।
नसबंदी न कराने के लिए परिवार वाले बना रहे थे दबाव
अशरफी बानो ने बताया कि उसके पति के अलावा परिवार के अन्य सदस्य नसबंदी न कराने का दबाव बना रहे थे, लेकिन वह और उसका पति नसबंदी कराना चाहते थे, जिसके चलते वह सीएचसी में आई थी। पुलिस ने बताया कि अशरफी के करीबी पर ही शक की सुई घूम रही है।
यह चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया जांच में महिला के करीबी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
- अजय यादव, एसओ