लखीमपुर खीरी। क्षमता से अधिक बंदियों और कैदियों के बोझ से दबी जेल में स्टाफ तक का टोटा है। हालात यह हैं कि मुख्य महिला बंदी रक्षक के दो और महिला बंदी रक्षक के नौ पद तो हैं, लेकिन दोनों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। कमोवेश यही हाल हेड बंदी रक्षक और बंदीरक्षकों के पदों का भी है। यह पद भी आधे से अधिक खाली हैं। इससे बंदी और कैदियों की निगरानी से लेकर जेल की सुरक्षा में भी समस्या आती है। फिलहाल जेल प्रशासन होमगार्डों के सहारे सुरक्षा व्यवस्था को किसी तरह चला रहा है।
जिला जेल की क्षमता महज 725 बंदियों और कैदियों को रखने की है, लेकिन हमेशा यहां बंदी और कैदियों की संख्या 15 सौ से अधिक ही रहती है। हाल में तो ढाई गुना अधिक कैदी और बंदी कैद हैं। इनमें जिले के कई खूंखार अपराधी भी शामिल हैं। वर्तमान समय में 32 महिला कैदी और बंदी सलाखों के पीछे हैं। बंदियों और कैदियों की निगरानी के लिए महिला बंदी रक्षक के नौ और हेड महिला बंदी रक्षक के दो पद हैं, लेकिन वर्तमान समय में दोनों पदों पर एक भी महिला की तैनाती नहीं है। चार पदों के सापेक्ष डिप्टी जेलर तीन हैं। चौथे डिप्टी डिप्टी जेलर राज्यमंत्री से संबद्ध हैं। इस वजह से तीन डिप्टी जेलरों से काम चलाया जा रहा है। मुख्य बंदी रक्षक के 19 पदों के सापेक्ष महज आठ और 95 बंदी रक्षकों के सापेक्ष मात्र 52 बंदी रक्षक तैनात हैं। आठ मुख्य बंदी रक्षकों में एक मुख्य बंदी रक्षक लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध है। मुख्य बंदी रक्षकों और बंदी रक्षकों की कमी के कारण जेल प्रशासन होमगार्डों को लगाकर निगरानी करा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि कई बार खाली पड़े पदों पर तैनाती कराने के लिए पत्र शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक पदों के मुताबिक तैनाती नहीं हो सकी है।
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मुख्य बंदी रक्षक और बंदी रक्षकों की काफी कमी है। मुख्य महिला बंदी रक्षक और महिला बंदी रक्षक एक भी नहीं हैं, जिससे समस्या तो काफी है। होमगार्डों को लगाकर काम लिया जा रहा है। शासन को पदों के अनुरूप तैनाती को लेकर एक पत्र भेजा गया है।
आरबी पटेल, जेल अधीक्षक
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