चौखड़िया में दिनदहाड़े सजायाफ्ता को गोली मार कर बांके से खांदा
खेत से वापस गांव जाते समय आरोपियों ने अपने घर के सामने की वारदात
आरोपी के पिता के 24 साल पहले हुए कत्ल के जुर्म में सजायाफ्ता था मृतक
बिजुआ। भीरा थाना क्षेत्र के चौखड़िया गांव में पुरानी रंजिश के चलते दिन दहाड़े एक सजायाफ्ता ग्रामीण की हत्या कर दी गई। हत्यारों ने पहले मृतक को अपने घर के सामने गोली मारी, फिर बीच खड़ंजे पर गिराकर बांके से तब तक खादते रहे जब तक मृतक के घर वाले आ नही गए। घटना को अंजाम देकर आरोपी आराम से गांव से निलक गए, रास्ते में एक युवक की बाइक छीनकर पड़रिया तुला पहुंचे। दहशत फैलाने के लिए आरोपियों ने पड़रिया तुला चौराहे पर कत्ल में प्रयोग किए बांके का खून साफ किया। बाद में पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है।
चौखड़िया गांव में दिन के करीब साढ़े दस बजे रमेश पुत्र माधव (55) अपने खेत से गांव आ रहे थे। आरोप है कि जैसे ही वह गांव में मालती के घर के पास पहुंचे घात लगाए बैठे मालती उनका भाई वीरेंद्र उनका पुत्र जंडेल एवं लायक ने गोली चला दी। मालती ने अपनी दोनाली लाइसेंसी बंदूूक के अलावा तमंचे से भी गोली चलाई। गोली लगते ही रमेश गिर गया। पीछे से आए आरोपियों ने बांके से सीने पर तब तक वार किए जब तक रमेश के घर लोग वहां पहुंच नही गए। घटना को अंजाम देकर आरोपी बड़े आराम से टहलते हुए चले गए। रास्ते में उन्होंने गोंधिया निवासी अभिषेक पुत्र पैकरमा को तमंचा दिखाकर बाइक छीन ली और फरार हो गए। बताया जा रहा है कि पड़रिया तुला पहुंचे आरोपियों को मुख्य चौराहे पर अपनी बंदूक एवं बांके समेत देखा गया। वहां वे इत्मीनान से बांके को सड़क पर धार लगा रहे थे। इस बीच कत्ल की चर्चा आम होने पर आरोपी भाग गए। बाद में लोगों की मदद से तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गांव पहुंचे एसओ संदीप सिंह एवं चौकी इंचार्ज सुनीत कुमार, एसआई अवधेश कुमार ने हालात का जायजा लिया और शव कब्जे में लेकर मृतक के पुत्र कुलदीप की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर लिया है। आरोपी एवं मृतक एक ही गांव के होने के कारण आरोपियों के घर पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
दिन दहाड़े पिता के हत्यारोपी को खांदकर 24 साल बाद लिया बदला
आरोपियों ने पहले मारी गोली फिर सड़क पर गिराकर बांके से खांदा
बिजुआ। दोनो परिवारों में दो दशक से पुरानी रंजिश है। 1994 में गांव के बादशाह यादव एवं मनोहर यादव के बीच जमीन का झगड़ा हुआ था। इसमें मालती के पिता माधव यादव अपने रिश्तेदार मनोहर की तरफ से एवं रमेश अपने रिश्तेदार बादशाह की तरफ से पक्षकार थे। इस विवाद में चली लाठी में एक लाठी माधव के सिर पर लग गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उस मामले में मालती ने अपने पिता की हत्या में बादशाह, रमेश एवं खजांची को नामजद किया था। इसी मुकदमे में साल 2003 में तीनों लोगों को साढ़े सात साल की सजा हुई, लेकिन बादशाह की हाईकोर्ट में अपील के बाद तीनों को जमानत मिल गई थी, तब से सभी जमानत पर थे। बताते हैं कि इस बीच दोनो परिवारों में एका हो गई थी, लेकिन मालती एवं उनका परिवार अपने पिता की मौत को नही भूला। जिस जगह पर आज रमेश की हत्या हुई, ठीक उसी जगह पर 24 साल पहले मालती के पिता की जान ली गई थी।
प्राइवेट स्कूल में गार्ड था आरोपी मालती
बिजुआ। मालती के पास लाइसेंसी बंदूक है, इसके चलते वह दबंग माना जाता है, मालती इसी बंदूक के दम पर मालपुर के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में गेट पर सशस्त्र गार्ड की नौकरी करता था। घटना के बाद जिसने भी सुना वह अवाक रह गया।
बीच सड़क पर करता रहा वार पर वार, नही बचाने आया कोई
बिजुआ। आरोपियों ने जब घटना को अंजाम दिया तब पूरा गांव इस रास्ते से आ जा रहा था, ठीक सामने एक घर भी है, दूर खड़े लोग वारदात होती देख रहे थे, लेकिन कोई भी मदद के लिए नही आया और न ही हत्या कर जा रहे आरोपियों को रोकने टोकने की किसी की हिम्मत पड़ी।