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खीरी में ठगी के पीछे पश्चिम बंगाल का कनेक्शन

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लखीमपुर खीरी। जनपद में चिटफंड कंपनी खोलकर लोगों से मेहनत की कमाई ठगने के गोरखधंधे का कई बार भंडाफोड़ हुआ, जिसमें हर बार पश्चिम बंगाल का कनेक्शन सामने आया है। हालिया दुधवा ग्रीन का मामला हो या फिर इंफोकेयर, एमबीके, फाल्कन जैसी कंपनियों का, जिनके मालिक पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस के हाथ इन ठगों की गर्दन तक नहीं पहुंच पाते, जिससे संगठित गिरोह बनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
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वर्ष 2010 में कोलकाता (पश्चिम बंगाल) की एमबीके प्राइवेट लिमिटेड ने गोला गोकर्णनाथ में ब्रांच खोली थी, जिसके बाद 2012 में विस्तार करते हुए लखीमपुर में मेला मैदान रोड पर दूसरी ब्रांच खोली थी। चार साल में करीब पांच हजार लोगों से नौ करोड़ रुपये जमा कराने के बाद 2014 में कंपनी के मालिक बोरिया बिस्तर समेटकर फरार हो गए थे। एक महिला की तहरीर पर सदर कोतवाली पुलिस ने कंपनी मालिक प्रफुल्ल कुमार कुंदू, अंशुमान घोष, सैकत ब्रह्मचारी, तन्मय कुंदू और समीउल्ला मंसूरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें समीउल्ला को छोड़कर बाकी सब पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने एक एजेंट को जेल भेजा था, लेकिन असल गुनहगार मालिकों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे। लिहाजा पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

इंफोकेयर, फाल्कन, रोजवैली ने भी करोड़ों ठगे
तराई क्षेत्र होने के कारण जनपद की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। ज्यादातर किसान चिटफंड कंपनियों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं, जिसका नतीजा रहा कि पश्चिम बंगाल की कंपनियों में जनपद के बड़े नगरों में अपना जाल बिछा दिया। मोटे कमीशन के लालच में आकर एजेंट भी कंपनी मालिकों के मंसूबों को भांप नहीं सके। कोलकाता की इंफोकेयर इंफ्रा एग्रो इंडिया ने भी 2012 में पलिया से ठगी की शुरुआत की, जिसके बाद चंदनचौकी, संपूर्णानगर, गोला, सुंदरवल, तिकुनिया, नकहा, मोहम्मदी के अलावा पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर, बहराइच, पीलीभीत में ब्रांचे खोलकर करोड़ों की ठगी की। इंफोकेयर ने दुधवा ग्रीन प्रोजेक्ट बनाकर जमीन बेचने के नाम पर लोगों से ठगी की। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की ही फाल्कन ने पलिया में 2013 में ब्रांच खोलकर लोगों को ठगा और 2015 में कंपनी के मालिक फरार हो गए। इसी तरह रोजवैली नाम की कंपनी ने लखीमपुर के एक होटल में दफ्तर खोलकर रियल स्टेट का कारोबार शुरू किया, लेकिन यह कंपनी भी भाग चुकी है।
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कई साल पुराना मामला है, जिसकी जांच संकटा देवी चौकी इंचार्ज कर रहे थे। विवेचना के दौरान काफी साक्ष्य जुटाए जा चुके है, जिसमें अभियुक्तों की गिरफ्तारी होनी है। अभियुक्तों के पते पर टीम भेजी गई थी, लेकिन बेरंग लौटी थी। अब मामले की पुन: पड़ताल कराएंगे।
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- अशोक कुमार पांडेय, प्रभारी निरीक्षक, सदर कोतवाली
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