लखीमपुर खीरी। प्रदेश में छह प्रजाति के पेड़ों को छोड़कर दूसरी प्रजातियों के पेड़ों के कटान पर छूट संबंधी आदेश पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 15 दिसंबर को स्थगनादेश जारी कर दिया है। एनजीटी ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए ने 30 जनवरी 2018 की तिथि निर्धारित की है। इस स्थगनादेश से जहां प्रकृति और पर्यावरण प्रेमियों में खुशी है वहीं लकड़ी व्यापारी मायूस हैं।
मालूम हो कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2017 को एक आदेश जारी कर छह प्रजातियों साल, सागौन, आम, नीम, महुआ और खैर को छोड़कर सभी प्रजातियों के पेड़ों के कटान और लकड़ी के अभिवहन से प्रतिबंध हटा लिया था। इस आदेश के खिलाफ अधिवक्ता आलोक शुक्ला, अमित कुमार, चिरंतनी चटर्जी और भंवर पाल सिंह की याचिका पर एनजीटी ने संबंधित आदेश पर यह स्थगनादेश जारी करते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से दो सप्ताह के अंदर जवाब तलब किया है।
मालूम हो कि प्रतिबंध हटने के बाद जिले में शीशम, यूकेलिप्टस, पापुलर, सेमल, जामुन समेत विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों का कटान तेज हो गया था। स्थगनादेश के बाद अब वन विभाग के परमिट के बिना किसी भी प्रजाति के पेड़ नहीं कट सकेंगे।
इस संबंध में जानकारी मिली है लेकिन कोई अधिकृत आदेश नहीं मिला है। जब तक आदेश नहीं मिलता तब तक वह अधिकृत रूप से कुछ भी नहीं कह सकते।
- समीर वर्मा, डीएफओ साउथ