कन्नौज। छात्र का अपहरण कर उसकी हत्या करने के मामले में एससी एसटी कोर्ट के जज दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने शुक्रवार को तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।हत्या में उम्रकैद, अपहरण कर फिरौती मांगने में उम्रकैद और हत्या के बाद लाश व सबूतों को छुपाने के जुर्म में तीनों को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट ने दोषियाें से 25-25 हजार रुपये अर्थदंड वसूलने के भी आदेश दिए हैं।
शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि नौ फरवरी 2014 को छिबरामऊ के इब्राहिम नगर निवासी सुरेशचंद्र दीक्षित ने छिबरामऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका पुत्र अभिनव दीक्षित उर्फ रेशू कानपुर के गीता नगर मोहल्ले में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग पढ़ रहा है। वह नौ फरवरी 2014 की सुबह नौ बजे कानपुर जाने के लिए घर से निकला था। उसके जाने के बाद घर में किसी ने फिरौती पत्र भेजा।
छिबरामऊ कोतवाली में तैनात एसआई ओपी सिंह ने मामले की जांच शुरू की। शक के आधार पर छिबरामऊ के मोहल्ला त्रिपाठी नगर के राजू पाल और बनवारी नगर निवासी अंशू भदौरिया को पकड़ा। पूछताछ में इन दोनाें ने कबूला कि 21 वर्षीय अभिनव की पड़ोसी आशीष के साथ मिलकर हत्या कर दी है। अभिनव व आशीष का घर आमने-सामने है। बताया कि अभिनव नौ फरवरी को कानपुर जाने के लिए गुरसहायगंज स्टेशन में खड़ा था।
तभी तीनों आरोपी आशीष की कार से गुरसहायगंज पहुंचे और उससे कहा कि वह सभी भी कानपुर जा रहे हैं। वह उनके साथ कानपुर चले। इस पर अभिनव उनके साथ कार में बैठ गया। आरोपियों ने गुगरापुर ब्लाक क्षेत्र के गांव सफियापुर के निकट एक पुलिया के नीचे ले जाकर रस्सी से उसका गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसकी लाश को कार में डालकर फर्रुखाबाद जनपद के शमसाबाद क्षेत्र के गांव अताईपुर की झाड़ियों में डाल दिया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी आशीष को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनाें की निशानदेही पर मृतक की लाश बरामद की गई। मृतक का पोस्टमार्टम फर्रुखाबाद जनपद में हुआ था। विवेचक ने विवेचना कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियाें को अपहरण कर हत्या कर देने और लाश को छुपाने का दोषी पाया। कोर्ट ने धारा 364ए के तहत अपहरण कर फिरौती मांगने के जुर्म में आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना, हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना और साक्ष्य छिपाने के जुर्म में तीन-तीन साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।