निघासन के गांवों में कच्ची शराब का धंधा जोरों पर चल रहा है, इसे देखते हुए गांव बोकरिहा की महिलाएं लामबंद हो गई हैं। सोमवार को महिलाएं आबकारी दफ्तर घेरने पहुंची, लेकिन वहां ताला देख उनका गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने जमकर प्रदर्शन किया। गांव बोकरिहा निवासी चंपा देवी, पूनम, मुन्नी देवी, मीना देवी, मउली, मुन्नी पत्नी राजेश, अमिका आदि ने बताया कि गांव में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग बन गया है। गांव के करीब 70 फीसदी लोग कच्ची शराब बनाकर उसे खुले आम स्टूल आदि पर रखकर बेंच रहे हैं। आरोप है कि कच्ची शराब बनाने और पीने में युवा पीढ़ी भी बर्बाद हो रही है। इस मामले की लिखित शिकायत आबकारी निरीक्षक गिरीश कुमार से की गई, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। एक बार फिर महिलाएं एकत्रित होकर आबकारी कार्यालय पहुंचीं। कार्यालय में ताला लटकता हुआ देखकर महिलाएं नाराज हो गई और प्रर्दशन करना चालू हो गई। करीब आधे घंटे तक प्रदर्शन के बाद महिलाएं कोतवाली पहुंची। वहां पर प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी से कार्रवाई की मांग की। संजय त्यागी ने पढुआ चौकी इंचार्ज नरेंद्र सिंह को कार्रवाई का आदेश दिया है। उधर आबकारी निरीक्षक गिरीश कुमार ने बताया कि स्टाफ कम था। छापेमारी के लिए टीम गई थी, इसलिए कार्यालय में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। अभियान चलाकर कच्ची शराब बनना बंद कराया जाएगा।
गांवों में धधक रही शराब की भट्ठियां, आबकारी विभाग मौन
नेपाल बार्डर से लेकर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने का करोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। बम्हनपुर क्षेत्र में कई असरदार व्यक्ति भी कच्ची शराब बनाने का काम कर रहे हें। क्षेत्र के मुहाना, जौरहा, सरयू, सुहेली, शारदा, घाघी नाला, बहतिया नाला आदि स्थानों पर शराब बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके अलावा जंगल में भी कच्ची शराब बनाई जाती है। आरोप है कि आबकारी विभाग इन कच्ची शराब के कारोबारियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा है। कच्ची शराब पीने से लीवर, किडनी जैसी भयंकर बीमारियां पनप रही हैं।
इन गांवों में भी बनती है शराब
गिरजापुरी, गंगानगर, रननगर, मांझा, चौगुर्जी, बथुआ, नौरंगाबाद, प्रीतम पुरवा, झंडी, खैरहनी, पुरैना, बल्लीपुर, मुर्गहा, बौधिया, तारानगर, मूडा, खैरीगढ़, सिसैया, रकेहटी, टांडा, कटहा, खरवहिया, मंझलीपुरवा, टापर पुरवा, कसावल, दरेरी, लोकई पुरवा, हथिया बोझ, पढुआ, गुलरिहा पत्थर शाह, कोनहा पुरवा, सहते पुरवा, लोनियन पुरवा समेत क्षेत्र के करीब 150 गांवों में कच्ची शराब बनाने का कारोबार चल रहा है।
कैसे बनती है कच्ची शराब
कच्ची शराब की लहन को तैयार करने के लिए सबसे पहले गुड़ को पानी में घोलकर गड्ढा आदि बनाया जाता है। उसके बाद पानी को ट्यूब या पालिथीन में दो तीन दिन तक रखा जाता है। लहन को जल्दी बनाने के लिए उसमें प्रतिबंधित ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन और यूरिया खाद मिलाकर उसको और अधिक उफान और नशीली बनाई जाती है। लहन तैयार होने के बाद ड्रम में भरकर उसमें भट्ठी पर चढ़ाकर नदी तालाब, नाला, जंगल आदि के किनारे बनाई जाती है।
कच्ची शराब का स्वास्थ्य पर पड़ता है अधिक असर
फिजीशियन डॉ. रवीन्द्र कुमार बताते हैं कि कच्ची शराब के पीने से शरीर का फूलना, लीवर, किडनी, शरीर का पीला पड़ना, अधिक कमजोर होना, लीवर कैंसर का खतरा, आंखे लाल रहना आदि शरीर पर असर डालकर यह बीमार बना देती हैं। इसके सेवन से करीब छह साल पहले बेलापरसुआ निवासी सोमनाथ, फंरेदा निवासी जगपति आदि लोगों की मौत शराब पीने से हो चुकी है।