फूलबेहड़ में पिता-पुत्र द्वारा अपने ही जिगर का खून किए जाने की घटना की वजह भले ही मामूली बताई जा रही हो, पर लोगों की जुबां कुछ और ही इशारा कर रही है।
शारदा नदी और जंगल के बीच बसे राघवपुर टपरा निवासी मछुआरा समुदाय के बुजुर्ग चखुरी और उसका परिवार मजदूरी और मछली की बिक्री से गुजर-बसर करता है। बताते हैं कि चखुरी के छोटे बेटे संजय की परिवारवालों से नही बनती थी, जबकि पत्नी का स्वभाव अलग था। संजय का अपने बड़े भाई रामधारी से अक्सर विवाद हो जाता था। बताते है पत्नी भी जेठ रामधारी का पक्ष लेती थी। शादी के बारह वर्ष बाद भी पति-पत्नी में भी अक्सर विवाद होता था। परिवार के लोग सोमवार को चकलुआ के पास गोंदी काटने गए थे। संजय भी साथ था। जाने क्या बात हुई कि बड़ा भाई रामधारी और पिता चखुरी संजय पर हमलावर हो गए। इस बीच सिर पर धारदार हथियार लगने से वह गिर पड़ा। मरा समझ उसे नहर में फेंक दिया। भले ही परिवारवाले और पुलिस नाव ही विवाद की वजह बता रही हो पर, ग्रामीण इससे इत्तेफाक नही रख रहें हैं।