बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। मुंडन संस्कार के लिए बन रही मिठाई के दौरान गैस लीकेज से गैस सिलिंडर फटने से एक ग्रामीण की मौत हो गई। ग्रामीण आग लगने की सूचना पर मदद करने मदद करने के लिए पहुंचा था, तभी सिलिंडर फटने से चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची भीरा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है।
हादसा भीरा थाना क्षेत्र के रामालक्ष्ना गांव में हुआ है। दरअसल गांव निवासी रामू सिंह के पुत्र का शुक्रवार को मुंडन संस्कार था, दरवाजे पर छप्पर के नीचे मिठाई बना रहे थे, और दूसरी तरफ अखंड रामायण का पाठ भी चल रहा था। इसी दौरान सिलिंडर की भट्ठी से आग धधकने से छप्पर में आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि लोगों को सिलिंडर निकालने का मौका तक नही मिला। तभी सिलिंडर ने आग पकड़ ली, इसी दौरान गांव के ही चंद्रभाल पुत्र रामस्वरूप (35) भी मदद को आ गए। लोगों की माने इसी बीच तेज धमाके के साथ सिलिंडर उड़ गए। सिलिंडर की चपेट में आने से चंद्रभाल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं पास में बंधी सुधीर सिंह की बछिया भी जल कर मर गई। सूचना पर पहुंचे कोतवाल रजित राम यादव एवं चौकी प्रभारी सुनीत कुमार गांव पहुंचे, मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है।
ड्यूटी से आया था, मदद की गुहार सुन पहुंच गया था चंद्रभाल
बिजुआ। चंद्रभाल मलूूकापुर स्थिति श्रीराम खांडसारी उद्योग क्रेशर पर मिल हाउस में मैकेनिक था, वह दो बजे की ड्यूटी कर घर जैसे ही पहुंचा, तभी आग लगने की सूचना गांव में फैल गई। चंद्रभाल एक जिम्मेदार नागरिक की तरह मदद को दौड़ पड़े, अभी वह आग बुझाने के लिए पहुंचे ही थे, कि सिलिंडर फटने से उसकी चपेट में आ गए। और मौके पर ही मौत हो गई। लोग जब आग बुझा चुके तो देखा कि चंद्रभाल मृत अवस्था में कुछ दूरी पर पड़े हैं।
धमाका इतनी तेज हुआ कि दीवारे थर्रा गईं
बिजुआ। हादसे के दौरान जब दो सिलिंडर तेज आवाज से फटे तो पूरे गांव में लोग डर गए। आस पास के घरों की दीवारें थर्रा गईं। सिलिंडर हवा में उड़कर करीब 100 मीटर दूर जा गिरे। सिलिंडर के चिथड़े उड़ चुके थे। आस पास गांव के लोग सुनकर मौके पर आ गए।
तीनों बच्चे हुए यतीम, बेवा हुई पत्नी
बिजुआ। चंद्रभाल घर का एकलौता पालनहार था, उनके हिस्से में महज पांच बीघा जमीन थी, जिस पर वह बैंक से कर्जा ले रखे थे। घर का खर्च चलाने के लिए चंद्रभाल क्रेसर पर सीजनल वर्कर का काम करते थे। उनकी कमाई से उनके बच्चे, पत्नी एवं बूढ़े मां-बाप का भी पेट भरता था। लेकिन हादसे ने एक परिवार से उसका पालनहार छीन लिया। यतीम हुए बच्चे अपनी मां के दामन को पकड़ कर रो रहे थे। बच्चों की हालत देखकर हर आंख नम थी।
...और सुधीर के घर पर भी छा गया मातमी सन्नाटा
बिजुआ। सुधीर के घर पर मुंडन संस्कार था। रिश्तेदार घर पर आ चुके थे। दरवाजे पर अखंड रामायण का पाठ पढ़ा जा रहा था, घर की औरतें ढोल पर मंगल गीत गा रहीं थीं। बच्चे घर के आंगन से बाहर तक घूम घूम कर मस्ती कर रहे थे। तभी अचानक एक हादसे से पूरा मंजर बदल गया। जिस आंगन में ढोल की थाप लग रहीं थीं, वहां सन्नाटा फैल गया। लोग बदहवास भाग खड़े ह़ुए।