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बदमाश पशु व्यापारी से 70 हजार रुपये लूटकर फरार

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लखीमपुर/महेवागंज। बाइक पर सवार होकर साथी के साथ दुबग्गा बाजार पशु खरीदने जा रहे एक व्यापारी को शुक्रवार की सुबह सदर कोतवाली क्षेत्र में दो बाइकों पर सवार पांच बदमाशों ने रोक लिया। दोनों की पिटाई कर 70 हजार रुपये लूटकर फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई वारदात से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। एएसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रभारी निरीक्षक सदर को जल्द घटना के खुलासे को निर्देश दिए हैं।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव झमपुरवा निवासी नबी अहमद और कासिम पशुओं की खरीद फरोख्त का कार्य करते हैं। शुक्रवार की सुबह दोनों एक बाइक पर सवार होकर दुबग्गा साप्ताहिक पशु बाजार में पशु खरीदने जा रहे थे। सुबह करीब आठ बजे शीतलापुर गन्ना सेंटर के पास पीछे से दो बाइकों पर सवार पांच बदमाशों ने उनकी बाइक ओवरटेक कर रोक ली। कासिम की कनपटी पर तमंचा लगाकर रुपये छीनने का प्रयास किया। विरोध करने पर बदमाशों ने नबी अहमद के सिर पर तमंचे की बट मार दी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा। साथी को घायल देख कासिम ने मदद के लिए शोर मचाना शुरू किया। इतने में बदमाश नबी से सत्तर हजार रुपये लूट कर भाग निकले। शोर शराबा सुन मौके पर तमाम ग्रामीण इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने महेवागंज पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने घटना स्थल रामापुर होने की बात कह पल्ला झाड़ लिया। खबर फैली तो एएसपी घनश्याम चौरसिया, एएसपी/सीओ सदर आरके वर्मा, रामापुर चौकी प्रभारी संतोष राय मौके पर पहुचे। मौका मुआयना दौरान पुलिस काफी देर सीमा विवाद में उलझी रही। करीब तीन घंटे चली मशक्कत के बाद अधिकारियों ने घटना स्थल रामापुर चौकी क्षेत्र का होना माना। एएसपी ने सदर कोतवाल को घटना के जल्द खुलासे के निर्देश दिए।

घटना को संदिग्ध मान मंथन में जुटी पुलिस
दुबग्गा बाजार रोड पर पशु व्यापारियों से लूट के मामले को पुलिस संदिग्ध नजरों से देख रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों व्यापारी अपने पास रुपये होने की बात कह रहे हैं। बदमाशों ने एक को ही टारगेट किया, जबकि उसके साथी के मुताबिक उसके पास भी 15 हजार रुपये मौजूद थे। ऐसे में बदमाशों ने उसे लूटने की कोशिश क्यों नही की। इस बात पर भी पुलिस मंथन कर रही है।
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घेराबंदी होती तो पकड़े जाते बदमाश
पशु व्यापारियों के साथ हुई 70 हजार रुपये की लूट को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस दो चौकियों के बीच सीमा विवाद को लेकर तीन घंटे तक उलझी रही। माना जा रहा है कि यदि पुलिस सीमा विवाद को छोड़कर अगर घेराबंदी कराकर बदमाशों की धरपकड़ करती तो बदमाश पकड़े जा सकते थे। मौके पर पहुंचे अफसरों ने भी बदमाशों की सुरागरसी करने की जरूरत नहीं समझी और वापस लौट गए।
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