सट्टेबाजों के चंगुल में फंसकर बर्बाद हुए गोला का एक छात्र इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन इस खेल ने चारों दिशाओं में अपनी जड़ें फैला रखी हैं। सट्टा कारोबार के जानकारों की माने तो शहर में प्रतिदिन एक करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ट्रांसफर्ड खेल के जरिए इस कारोबार के तार सीतापुर से जुड़े हैं। सट्टे के खेल ने कई लोगों की जिंदगी प्रभावित कर रखी है। बड़े पैमाने पर होने वाले कारोबार का सरगना भी कहीं दूर नहीं बल्कि शहर की सराफ मार्केट का एक सराफ है।
शहर से लेकर कस्बे तक सट्टेबाजों का नेटवर्क फैला है। कोतवाली पुलिस ने पिछले वर्ष शहर के मेला मैदान में एक मकान पर छापा मारा था। मौके पर पुलिस ने कई पर्ची, नकदी, मोबाइल और रजिस्टर आदि बरामद कर छह लोगों को दबोचा भी था। थाना भीरा क्षेत्र के पड़रिया तुला में एक मोबाइल शॉप की दुकान करने वाला युवक सट्टेबाजी में फंसकर हजारों रुपये गवां बैठा था। मामले में भीरा पुलिस ने महेवागंज के एक युवक समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस की निष्क्रियता से काफी दिनों तक मामला पेंडिंग पड़ा रहा। इसका फायदा आरोपियों ने समझौते के रूप में उठाया। करीब चार माह पूर्व चौकी पुलिस ने सट्टेबाजी के आरोप में एक परचून दुकानदार को हिरासत में लिया था। दो घंटे बाद बगैर लिखापढ़ी उसे छोड़ दिया गया। सट्टा कारोबार के जानकारों की माने तो जिले में प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार होता है। सट्टा कारोबार के जानकारों की मानें तो शहर में होने वाले सट्टे का सरगना एक सराफ है। इसके अलावा इसके तार सीतापुर जिले के एक बड़े स्तर के सट्टा कारोबारी से जुड़े हैं। ऐसा नहीं है कि सरगना और उसकी देखरेख में शहर में विभिन्न स्थानों पर चल रहे इस अवैध कारोबार में लिप्त लोगों की जानकारी पुलिस को नहीं है, लेकिन पुलिस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ के कारण कारोबार को संचालित करने वालों पर हाथ नहीं डालती। पुलिस सट्टा खेलने वाले छोटे-मोटे सटोरियों को गिरफ्तार करती है और कागजी कोरम पूरा कर अपना पल्ला झाड़ लेती है।
शहर के पांच इन स्थानों पर होता है बड़ा खेल
वैसे तो शहर में कई स्थानों पर सट्टे का कारोबार होता है। लोग बाकायदा कुर्सी मेज डालकर बैठते हैं और सट्टा पर्ची लिखते दिख जाएंगे, लेकिन शहर के मेला मैदान में करीब प्रतिदिन पांच लाख, एलआरपी बाईपास पर एक कार सेल पर पांच से 10 लाख, गुड़मंडी में 10 लाख और कारोबार के किंग सराफ के वहां 50 लाख रुपये प्रतिदिन का सट्टा कारोबार होता है।
यह है खेलों का नाम और शुरू होने का समय
शहर में चार तरह के सट्टे को लेकर खेल होते हैं। इनमें कोश्ती गेम सुबह 11 बजे से 12.5 बजे तक, हेनसंग दोपहर 1.00 बजे से 1.40 मिनट तक, सेंसेक्स दोपहर 2.30 बजे से 3.30 बजे तक और डाउन जोन रात एक बजे से 1.30 बजे तक चलता है।
बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी
पुलिस की ढिलाई से युवा वर्ग सट्टेबाजी के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो रहा है। गोला की घटना ने लोगों की यादें ताजा कर दी हैं। कुछ अभिभावक बच्चों की मॉनिटरिंग करने लगे हैं। ये बात दीगर है कि मामला अब तक बंद पेटी में है। पुलिस की सरपरस्ती में चल रहे इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा पाना पुलिस अफसरों के लिए आसान नहीं हैं। पुलिस यदाकदा गुडवर्क दिखाने के लिए सिर्फ सट्टा खेलने वाले एक दो लोगों को पकड़कर कागजी कार्रवाई पूरी कर पल्ला झाड़ लेती है। ऐसा भी नहीं है कि हल्का पुलिस को सटोरियों के अड्डों का पता नहीं है।
सट्टेबाजों में 70 फीसदी हैं युवा
जिले में सट्टा कारोबार की जड़ें काफी गहरी हैं। शहर से लेकर देहात इलाकों के छोटे-छोटे कसबों और नगरों में भी सट्टा कारोबार धड़ल्ले से होता है। सट्टेबाजों में 70 फीसदी युवा पीढ़ी जुड़ी हुई है, जो बर्बादी के कगार पर पहुंच चुकी है। यह कारोबार झगड़ा-फसाद से लेकर बड़े अपराधों को जन्म दे रहा है। अब तक यह शहरों में ही चल रहा था, लेकिन अब यह ग्रामीण इलाकों में अपनी जड़े जमा चुका है।
समय-समय पर अभियान चलाकर सटोरियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। सट्टा कारोबार करने वालों को चिह्नित किया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एस चन्नप्पा, एसपी