सिराजुद्दीन की मौत की वजह साफ नहीं, विसरा सुरक्षित
टेरर फंडिंग के मामले में ढाई महीने से था बंद
बंदी की मौत पर जेल प्रशासन
की कार्यशैली पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद बरेली निवासी सिराजुद्दीन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है। डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित किया है। मौत के पूर्व हुई जांच रिपोर्ट में उसके हाईड्रो सिफलस (दिमाग में पानी) की बीमारी से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई है। खास बात यह है कि इस गंभीर बीमारी की जानकारी जेल प्रशासन को नहीं हुई। डॉक्टरों ने भी बीमारी के लक्षण न दिखने के जेल प्रशासन की बात पर हैरानी जताई है। इसके अलावा अन्य कई ऐसे सवाल हैं, जिन्होंने बंदी की मौत मामले में जेल प्रशासन की कार्यशैली को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
थाना निघासन पुलिस और यूपी एसटीएफ लखनऊ ने 11 अक्तूबर 19 को टेरर फंडिंग का खुलासा किया था। 18 अक्तूबर को यूपी एटीएस ने इस मामले में बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी सिराजुद्दीन को जेल भेजा था। तब से सिराजुद्दीन समेत नौ आरोपी जिला जेल में बंद हैं। पांच जनवरी की तड़के सिराजुद्दीन (28) की हालत बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने पहले उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से डॉक्टर ने जांच आदि कराकर लखनऊ रेफर कर दिया। अगले दिन उसकी लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। जेल प्रशासन की सूचना पर लखनऊ पहुंचे परिवार वाले शव बरेली ले गए। इस मामले में जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जेल अधीक्षक आरबी पटेल की माने तो पांच जनवरी की सुबह जब जेल खुली। सभी बंदी उठ गए, लेकिन सिराजुद्दीन नहीं उठा। सूचना पर वे और जेल डॉक्टर सुनील कुमार अजय मौके पर पहुंचे। बंदी को हिलाया डुलाया, लेकिन वह बेसुध हालत में था। उनका कहना है कि जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में हुई जांचों से बंदी सिराजुद्दीन हाईड्रो सिफरल (दिमाग में पानी) जैसी गंभीर बीमारी का पता चला। उनका दावा है कि कभी भी सिराजुद्दीन ने बीमारी के बारे में जेल प्रशासन व अपने साथियों को नहीं बताया। न ही सिर दर्द आदि की जानकारी दी। कोई ऐसे लक्षण भी नहीं दिखे, जिससे इतनी गंभीर बीमारी की जानकारी हो सके। उधर मृतक बंदी को देखने वाले डॉ. राजकुमार का कहना है कि बीमारी के लक्षण पहले से जरूर रहे होंगे, यह अलग बात है कि लक्षणों पर गौर नहीं किया गया।
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सजायफ्ता कैदी की हालत बिगड़ी, भर्ती
लखीमपुर खीरी। दुष्कर्म के मामले के सजायफ्ता कैदी नजीर (40) की सोमवार को हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल प्रशासन ने उसे एक नंबर बैरक में रखा था। वह पाकशाला में काम करता था। जेल अधीक्षक आरबी पटेल ने बताया कि दुष्कर्म के मामले में वह दस साल की सजा काट रहा था।
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वर्जन....
बंदी ने कभी बीमार होेने की बात नहीं बताई। न ही उसके साथियों ने कोई जानकारी दी। तड़के जब जेल खुली तो वह बेसुध हालत में था। उसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मैं खुद ही जिला अस्पताल में मौजूद रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं हुई है। डॉक्टर ने विसरा सुरक्षित किया है। जेल प्रशासन ने इलाज में कोई ढिलाई व लापरवाही नहीं की है।
-आरबी पटेल, जेल अधीक्षक