लखीमपुर खीरी। भाकियू (लोकतांत्रिक) के नेताओं की बेइज्जती से परेशान होकर गोला के वीडीओ त्रिवेंद्र कुमार के आत्महत्या करने के मामले में नामजद सभी नौ आरोपियों पर रासुका और गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। पुलिस मुख्य आरोपी समेत चार को अभी गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
लखीमपुर शहर की शिवसागर कॉलोनी के रहने वाले त्रिवेंद्र कुमार ने चार सिंतबर को अपने घर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में नौ आरोपियों में से पुलिस पांच आरोपियों को जेल भेज चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी भाकियू (लोकतांत्रिक) के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह चौहान समेत चार लोग अभी हाथ नहीं आए हैं। गिरफ्तारी का दबाव बढ़ने पर ने चारों के खिलाफ गिरफ्तारी के लिए गैरजमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी कराया है। एसपी पूनम ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित स्थानों पर छापे मार रही है। उन्होंने बताया कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रासुका लगाई जाएगी, इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। ब
एनबीडब्लू तो छलावा, पुलिस पर राजनीतिक दबाव
पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को किस तरह गुमराह करती है, इसकी बानगी वीडीओ सुसाइड मामलें में साफ दिख रही है। वीडीओ त्रिवेद्र की खुदकुशी के मामले में भी पुलिस होमवर्क के बजाय कागजी घोड़े दौड़ाने में व्यस्त है। खुदकुशी के लिए प्रेरित किया जाना 10 वर्ष के कारावास से दंडित गैरजमानतीय और सेशन ट्रायल मामला है। इसमें पुलिस को प्रारंभ से ही बिना वांरट गिरफ्तारी की शक्तियां प्राप्त हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव में पुलिस पूरे मामले को उलझाने में लगी है। बता दें कि आरोपी लखनऊ में राजनीतिक शरण लिए हुए हैं। उन्हें सत्ता पक्ष के एक विधायक समेत कुछ राजनीतिक हस्तियों का संरक्षण प्राप्त है। वहीं गिरफ्तारी में देरी इस ओर भी इशारा कर रही है कि बाकी अभियुक्त स्टे आर्डर हासिल कर लें। कुछ समय पहले किसान ओमप्रकाश के खुदकुशी के माममें में ऐसा ही हुआ था, आरोपी प्रधान व अन्य ने गिरफ्तारी पर स्टे पा लिया था।
नहीं जुटाई फोरेंसिक रिपोर्ट
मृतक त्रिवेंद्र के सुसाइड नोट की लिखी लिखावट को भी फोरेंसिक सबूतों के सहारे पक्का करने की जहमत नहीं उठाई। न ही उसके मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालकर यह जानने का प्रयास किया कि किसी ने घटना वाले दिन भी तो फोन करके त्रिवेंद्र पर दबाव तो नहीं बनाया था। उसके सर्विस रिकार्ड को लेकर पूर्व में दिए गए उसके प्रार्थना पत्रों को भी तफ्तीश में नहीं शामिल किया गया।
तफ्तीश में नहीं शामिल हुई तहसीलदार की भूमिका
वायरल वीडियों में किसान महापंचायत में मौजूद तहसीलदार गोला के सामने ही माइक थमाकर त्रिवेंद्र को संबोधित किया जा रहा है, वहीं आला अधिकारी के तौर पर आपत्ति जताने के बजाय तहसीलदार मुस्कुराते हुए नजर आ रहे है, इस वीडियो के वायरल होने के बाद से तहसीलदार की भूमिका पर सवाल उठ रहा है लेकिन पूरी विवेचना में इस ऐंगल पर कोई भी तफ्तीश नही की गई।