बिजुआ। मत्स्य पालन पट्टा दिलाने के नाम पर पट्टेदार से 10 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में जेल में बंद लेखपाल जीवन लाल की जमानत अर्जी खारिज हो गई। लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के बाद यह फैसला किया। उसे 20 अगस्त को लखनऊ से आई विजीलेंस टीम ने पलिया तहसील में रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
लेखपाल जीवन लाल एक साल से पलिया तहसील के शाहपुर ग्राम पंचायत में तैनात था। उस पर गांव के ही किसान ने मत्स्य पालन पट्टा की फाइल पर हस्ताक्षर कर पास करने के नाम पर 10 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप लगाकर लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत की थी। उसके बाद 20 अगस्त को विजीलेंस टीम ने तहसील से रिश्वत लेते लेखपाल को रंगे हाथ पकड़ लिया था। 21 अगस्त को टीम ने लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। 27 अगस्त को आरोपी लेखपाल ने जमानत अर्जी लगाई। सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट नं. 94 पीसी एक्ट 9 जज गौरव शर्मा ने लेखपाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
20 साल शारदा किनारे के गांवों में की नौकरी
लेखपाल जीवन लाल ने साल 1997 में नौकरी ज्वाइन करने से 2019 तक करीब 20 साल शारदा नदी के किनारे ग्राम पंचायतों जैसे रामनगर कलां, शाहपुर, बझेड़ा और बिजुआ में तैनाती ली। माना जाता है कि नदी किनारे के गांव में पट्टा बनाने के नाम पर लंबे खेल होते हैं, इन खेलों में माहिर माने जाने वाले लेखपाल पर रामनगर कलां में भी आरोप लगते रहे हैं।
लेखपाल फोन पर लगातार मांग रहे थे रुपये
जिस मत्स्य पालक पट्टेदार ने लेखपाल को सलाखों के पीछे भिजवाया, वह हाईस्कूल फेल है। पट्टेदार की पत्नी सरोजनी भी साक्षर मात्र है। लेखपाल को विजीलेंस से पकड़वाने के काम को उसने इतनी कम शिक्षा के बाद भी अंजाम दे डाला।
किसान जयकुमार ने बताया कि रोज लेखपाल पट्टा की फाइल करने के नाम पर पैैसा मांग रहे थे। उसके पास विस्वा जमीन है। तालाब में मछली पालकर परिवार का पेट भरता है। गांव में ब्याज पर भी पैसा नहीं मिल पाता। ऐसे में लेखपाल को देने के लिए रुपये कहां से लाता। उसके पास विजीलेंस में शिकायत के अलावा कोई चारा नही बचा था। पट्टेदार को आशंका है कि छूटने के बाद लेखपाल उसे नुकसान न पहुंचा दे या फिर दूसरे लेखपाल उसे नुकसान न पहुंचा दें।