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टेरर फंडिंग: सुनीता और सरवन की गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय हुई एटीएस

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लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग मामले में सुनीता और सरवन के नाम सामने आने के बाद एटीएस उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है। एटीएस की बॉर्डर पर सक्रियता बढ़ने के बाद नेपाल बॉर्डर के भारतीय गांवों में खलबली मची हुई है। ऐसे कई गांव हैं, जिनमें इन नाम के कई लोग रहते हैं। ऐसे में लोग उन्हें शक की निगाह से देख रहे हैं। अब इसका पटाक्षेप गिरफ्तारी के बाद ही हो सकेगा कि ये सुनीता और सरवन कौन हैं।
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नेपाल के जरिए टेरर फंडिंग का निघासन थाना पुलिस और एटीएस ने खुलासा करते हुए 11 अक्तूबर को बरेली के थाना इज्जतनगर निवासी उम्मेद अली व सलीम सलमानी, तिकुनियां के संजय अग्रवाल और बादलपुरवा (तिकुनियां) निवासी एराज अली को गिरफ्तार किया था। मामला गंभीर होने के कारण उसे जांच के लिए एटीएस के सुपुर्द कर दिया गया था। इसके साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई थीं। एटीएस ने इसी बीच बरेली के परतापुर चौधरी निवासी फहीम और सिराजुद्दीन को भी गिरफ्तार कर लिया, जबकि आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए मास्टरमाइंड माना गया सदाकत पुलिस के हाथ आने से पहले भाग निकला था और बाद में पुराने एक मामले में जेल चला गया था। एटीएस ने फहीम और सिराजुद्दीन की पूछताछ के बाद मुंबई से दो नाइजीरियन समेत तीन को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार दोनों नाइजीरियाई आरोपियों से पूछताछ में पता चला था कि नेपाल सीमा के एक गांव के सरवन और सुनीता नाम के दो लोग उन्हें नेपाल से रकम लाकर देते थे। वे दोनों यह रकम उन खाताधारकों से लाकर देते थे, जिनके खाते में नाइजीरियाई हस्तांतरित करते थे। खाते से रकम निकाले जाने के बाद रकम उन दोनों को थमा दी जाती थी। इसके बाद उन्हें पुलिस और खुफिया एजेंसी से बचाकर यह रकम भारतीय सीमा में लाना होता था। फिर यह रकम भारतीय मुद्रा में बदली जाती थी। अब इन दोनों की गिरफ्तारी से यह राज भी खुल सकता है कि बॉर्डर पर वे बिना पकड़े आखिर कैसे भारत में अंदर तक यह रकम ले आते थे।
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