लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग मामले में नाइजीरिया के दो लोगों की गिरफ्तारी से साफ हो गया है कि नाइजीरिया के अपराधियों के लिए नेपाल बॉर्डर काफी मुफीद है। तीन साल पहले भी दो नाइजीरियाई तीन दिनों तक शहर के एक होटल में ठहरकर गए थे। कई दिन बाद पता चलने पर एलआईयू ने सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मगर उसके बाद सब कुछ भुला दिया गया। उन दोनों के आने का मकसद का 36 महीने बाद भी पता नहीं लगाया गया।
खीरी जिला नेपाल बार्डर से सटा हुआ है। इस जिले की नेपाल से सटी सीमाएं खुली हैं। दोनों देशों की सीमाओं पर घने जंगल हैं। जंगलों के सुगम रास्ते से भारत में दूसरे देशों के अपराधियों की घुसपैठ की भी आशंका बनी रहती है। नाइजीरिया निवासी सिटू मायूमी वनडे और लियो नेपाल बॉर्डर के रास्ते वर्ष 2016 में 15 दिसंबर को लखीमपुर शहर पहुंचे और मोहल्ला थरवरनगंज स्थित एक होटल में तीन दिनों तक ठहरे थे। कई दिन बाद पता चलने पर एलआईयू इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव ने होटल प्रबंधक हाथीपुर निवासी दिनेश गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। प्रबंधक पर विदेशी नागरिकों के ठहरने की जानकारी न देने और विदेशी अधिनियम 14 के उल्लंघन की धाराएं लगीं। विवेचक दरोगा राजबली सिंह ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। चूंकि इस मामले में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, इसलिए विवेचक ने धारा 41 की प्रबंधक को नोटिस देकर पल्ला झाड़ लिया।
वहीं नाईजीरियाई सिटू मायूमी वनडे और लियो यहां क्यों आए थे, इसका अब तक खुलासा नहीं हुआ। जबकि टेरर फंडिंग मामले में यूपीएटीएस की जांच में यह सामने आया है कि करीब 10 साल से नेपाल बॉर्डर पर टेरर फंडिंग का काम हो रहा था। इससे होटल में ठहर कर जाने वाले दोनों नाइजीरियाई भी संदेह के घेरे में हैं। एटीएस और खुफिया विभाग के अफसर भी इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं। अब पकड़े गए नाईजीरियाई दोनों अपराधियों की नेपाल बॉर्डर पर गहरी पकड़ सामने आई है।
अगर सही से जांच होती तो खुलते कई राज
तीन साल पहले होटल में ठहरे दो नाईजीरियाई केवल होटल में रहने तो आए नहीं होंगे। आखिर वे कहां-कहां गए, क्या किया, आदि सवालों पर जांच होती तो तभी कई राज खुल सकते थे। होटल में दिखाया गए वीजा और पासपोर्ट की ही जांच कर ली गई होती तो भी उनके बारे में कई बातें पता चल जातीं, मगर कुछ नहीं किया गया।
टेरर फंडिंग की मार से उबरा तिकुनियां बाजार
टेरर फंडिंग मामले का 11 अक्तूबर को खुलासे के बाद कार्रवाई के डर से तिकुनियां व अन्य जगहों के बाजारों में छाया सन्नाटा अब खत्म होता दिख रहा है।
एटीएस और सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के कारण नेपाल सीमावर्ती तिकुनियां, बनवीरपुर और बेलरायां के व्यापारियों ने नेपाली करेंसी लेना बंद कर दिया था। खासतौर से टेरर फंडिंग के लिए तिकुनियां में नेपाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलने की बात सामने आई थी। एटीएस के खौफ के कारण नेपाली नागरिकों और व्यापारियों की आवाजाही न के बराबर हो गई थी। दो दिनों से नेपाली नागरिकों और व्यापारियों का आना-जाना शुरू हो गया है। व्यापारी भी अब नेपाली करेंसी लेने लगे हैं। इससे तिकुनियां बाजार में रौनक लौट आई है। हालांकि इसके पीछे दीपावली की खरीदारी भी एक बड़ा कारण है।