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टेरर फंडिंग: नेपाल बॉर्डर के बाजारों की रौनक भी गायब

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लखीमपुर खीरी/तिकुनियां। नेपाल के जरिए भारत में बैठे आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाने का खुलासा होने के बाद सीमा पर की गई सख्ती का असर भारतीय बाजारों पर पड़ा है। नेपाली ग्राहकों की संख्या न के बराबर हो गई। नेपालियों से गुलजार रहने वाले तिकुनियां सहित अन्य जगह के बाजार में रौनक गायब है। इससे कामधंधा आधा रह गया है। ये हालात तब हैं जबकि दिवाली का त्योहार नजदीक है।
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भारत-नेपाल सीमा पर बसे तिकुनिया मंडी के दुकानदारों का मित्रराष्ट्र नेपाल की मंडी टीकापुर, राजापुर, भजनी आदि से काफी पुराना नाता है। कुछ समय पहले तक नेपाल से बड़ी संख्या में सुबह ही तमाम दुकानदार और आम लोग तिकुनियां व बेलरायां मंडी आ जाते थे। अपनी जरूरत की वस्तुएं चीनी, चायपत्ती, बिजली, हार्डवेयर का सामान, बर्तन, किराना का सामान, सब्जी आदि फुटकर व थोक में लेकर दोपहर दो बजे तक वापस लौट जाते थे। इससे बाजार गुलजार रहते थे। यही हाल संपूर्णानगर के बसही बॉडर्र, पलिया, गौरीफंटा के फड़ और सामान्य बाजारों का था। नेपाली नागरिक सामान खरीदने के बाद आमतौर पर नेपाली मुद्रा ही दुकानदार को देते थे। दुकानदार भी नेपाल मुद्रा लेने के लिए मजबूर होता था। अब 11 अक्तूबर को टेरर फंडिंग का खुलासा होने के बाद से जहां करेंसी को लेकर व्यापारियों में दहशत व्याप्त हो गई, वहीं नेपाली नागरिक भी घबरा गए। सीमा पर कड़ी चौकसी और निगरानी के कारण नेपाली नागरिकों ने बाजार में आना काफी कम कर दिया। इक्का-दुक्का ही नेपाली नागरिक बाजारों में दिख रहे हैं। इससे व्यापार पर भी खासा प्रभाव पड़ा है। कभी दिवाली से हफ्ते भर पहले नेपालियों से ये बाजार गुलजार रहती थीं, लेकिन इस बार सन्नाटा पसरा है।
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