मितौली कस्बे में स्थित प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक की गढ़ी को 1857 में अंग्रेजों ने ध्वस्त कर दिया था। उस गढ़ी के अवशेष आज भी मौजूद हैं। इन अवशेषों में 200 वर्ष पुराना गढ़ देवेश्वर महादेव मंदिर और एक मजार लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। इस गढ़ी के खंडहरों को पर्यटन केंद्र का रूप देने के बजाय अब जिला प्रशासन इसका वजूद मिटाने पर तुला है। शनिवार को सैकड़ों लोगों ने यहां एकत्र होकर शिव मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद स्वतंत्रता संग्राम की इस धरोहर को संरक्षित करने की मांग की।
राजा लोने सिंह गढ़ी संरक्षण समिति प्रथम स्वाधीनता संग्राम की इस गौरवशाली धरोहर को बचाने में जुटी है। समिति के संयोजक कृष्ण कुमार मिश्र के प्रयासों से करीब 100 वर्ष बाद इस वर्ष गढ़ी स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो सकी है। क्षेत्रीय विधायक और क्षेत्रीय जनता के सहयोग से गढ़ी को संवारने का कार्य जारी है। समिति ने हाल ही में गढ़ी पर फलदार पौधे रोपित किए। कुछ दिन पूर्व गढ़ी के खंडहर पर तहसील आवास बनाने के लिए जेसीबी चलाई गई। इसका स्थानीय जनता ने विरोध किया। क्षेत्रीय विधायक सुनील कुमार लाला इस विरासत को बचाने के लिए आगे आए। विधायक के हस्तक्षेप से फिलहाल काम रुक गया है। राजा लोने सिंह गढ़ी संरक्षण समिति के संयोजक कृष्ण कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री भारत सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फैक्स कर मितौली की इस राष्ट्रीय धरोहर को संरक्षित करने का आग्रह किया है। 1857 के इस चिह्न को बचाने के लिए शिक्षक संगठन तहसील अधिवक्ता संघ और युवा व्यापार मंडल आगे आए हैं। साथ ही जनमानस भी भावनात्मक रूप से राजा लोने सिंह की इस गढ़ी की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।