प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान, खुद की व दूसरों की जान खतरे में डाल रहे लावारिस पशु
मितौली। गो आश्रय केंद्रों की दयनीय दशा के कारण लावारिस गोवंश सड़कों पर इधर-उधर भटक रहा है। इधर, जहां गो आश्रय स्थल हैं, भी वहां सिर्फ केवल सूखे भूसे के सहारे चल रहे हैं।
मितौली ब्लाक की 91 ग्राम पंचायतों में मात्र दो गौशाला संचालित हैं। जिसमें लोहन्ना में ग्राम पंचायत द्वारा व लल्हौआ में जिला पंचायत द्वारा गो आश्रय केंद्र संचालित किया जा रहा है। लोहन्ना में 150 की क्षमता वाले गो आश्रय केंद्र का संचालन केवल ग्रामोद्योग सेवा संस्थान एनजीओ के माध्यम से कराया जा रहा है। वहां वर्तमान में 237 पशु गोशाला में है। हरे चारे का कोई प्रबंध नहीं है। सूखे भूसे व पानी के सहारे पशुओं का रखरखाव किया जा रहा है। इसी तरह लल्हौआ ग्राम पंचायत में जिला पंचायत द्वारा संचालित गोआश्रय केंद्र में 170 पशु मौजूद हैं। जो क्षमता से अधिक बताए जा रहे हैं। यहां पर भी सूखा भूसा मिल रहा है। कुल मिलाकर क्षेत्र में दो गो आश्रय केंद्र ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं। शाम होते ही सड़कों पर लावारिस गोवंश के झुंड दिखने लगते हैं, जबकि लावारिस मवेशियों के लिए गोशालाएं होनी चाहिए। लेकिन, प्रशासन इसमें नाकाम है।
पशुओं का नही हो पा रहा इलाज
पशु चिकित्सकों को नियमित गोशालाओं का भ्रमण करने के आदेश हैं, लेकिन वह हफ्तों गोशालाओं की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। इलाज के अभाव में उन्हें तड़प तड़प कर जान गंवानी पड़ रही है। यही हाल लावारिस मवेशियों का भी है। खेतों में लगे कटीले ब्लेड वाले तारों से घायल गोवंश घायल अवस्था में पड़े कराहते रहते हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल रहा।
फसल भी हो रही बर्बाद
लावारिस मवेशियों की वजह से किसानों की फसल भी बर्बाद हो रही है। जिस खेत में यह घुस जाते हैं, वहां फसल का सफाया करके रख देते हैं। किसान वर्ग को इन पशुओं के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिसके चलते किसानों का कहना है कि खेतों में दिनरात पहरा देने के बावजूद भी लावारिस मवेशियों से मुक्ति नहीं मिल पा रही।
चपरतला। मैगलगंज क्षेत्र में दो गोशालाएं, ढखौरा व बाइकुआं गांव में बनाई गई हैं। लाखों का बजट मिलने के बाद भी वहां कोई इंतजाम नहीं हैं। लगातार सूखा भूसा दिया जा रहा है, जिससे आए दिन मवेशियों की मृत्यु हो रही है। बाइकुआं की गोशाला में इस समय 297 गोवंश हैं। यहां पर पहले से हरे चारे की व्यवस्था हो रही थी। अब सिर्फ सूखा भूसा दिया जा रहा है।
मितौली ब्लॉक में दो गोशालाएं संचालित हैं। जिसमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। नकारा ग्राम पंचायत में 250 क्षमता वाला तथा कैमहरा ग्राम पंचायत में 100 पशुओं की क्षमता वाला गौ आश्रय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। जिसमें आवारा पशुओं को भी संरक्षित किया जा सकेगा। जल्द ही लोगों को समस्या से निजात मिलेगी।
- खंड विकास अधिकारी पसगवां अशोक कुमार सिंह ने गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि वह अभी नए आए हैं, और उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जानकारी चाहिये तो डॉक्टर से बात कर लीजिये।