इस कारण वह समय-समय पर बदायूं आता जाता था। वादी का आरोप था कि शहर के मोहल्ला चाहमीर मढ़ई चौक के नजदीक रहने वाले दिशांत रस्तोगी और उनके पिता सुबोध रस्तोगी की दुकान पर उसका आना-जाना था। उनके पास जेवर रखे, जिसे वह वापस नहीं दे रहे थे। विवाद बढ़ने पर उसने उनके खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया था।
सुनवाई के दौरान खुली पोल
सुनवाई के दौरान जब गवाहों और वादी के बयानों की पड़ताल हुई तो यह पाया गया कि उन्होंने अदालत के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और असत्य बयान दिए। अदालत ने इसे न्याय की प्रक्रिया से खिलवाड़ मानते हुए वादी और उसके गवाहों पर ही कार्रवाई का आदेश दे दिया।
न्यायालय के आदेश के बाद वादी अजीत पाल सिंह और उसके दो गवाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह आदेश उन सभी लोगों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है जो न्यायालय में झूठी गवाही देकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।