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दो हत्यारों को उम्रकैद, जुर्माना भी

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लखीमपुर खीरी। योजनाबद्ध तरीके से युवक को अगवा कर हत्या के मामले में एडीजे अनिल यादव ने दो हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमा रमन सैनी ने बताया की कोतवाली सदर में रहने वाले सुनील तिवारी को उसके साथ दोस्ती का दिखावा करने वाले, रईस घोसी और उमेश यादव योजनाबद्ध तरीके से 17 अप्रैल 2005 को यह कहकर घर से बुलाकर ले गए थे कि शादी के कार्ड बंटवाने हैं। उसके बाद से सुनील का कोई पता नहीं चला। इस संबंध में सुनील के पिता सत्यदेव तिवारी ने कोतवाली सदर में रईस घोसी, उमेश यादव के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कई दिन तलाश के बाद भी सिंगाही थाना क्षेत्र के ग्राम भैरमपुर स्थित जौराहा नाले में 20 अप्रैल को सुनील तिवारी का शव मिला था। पुलिस ने तफ्तीश करते हुए रईस घोसी, उमेश यादव देशराज, सिद्धराज, किशोर लुनिया, धनेश राय, ध्रुव कुमार और विजय यादव को हत्या के मामले में दोषी पाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। अदालती सुनवाई में सत्य देव तिवारी, नितिन तिवारी, डॉ राजेंद्र प्रसाद, शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी, तेज बहादुर सिंह, राजाराम भारती, रामदयाल, राजकुमार, राम दुलारे, महेश मिश्रा, अनिल प्रकाश सहित 11 गवाह पेश हुए थे, जिनके बयानों के आधार पर अदालत ने रईस घोसी और उमेश यादव को दोषी पाया। इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों हत्यारों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही अन्य छह आरोपी को सुबूत के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी किया है।
अनुसूचित जाति की किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की कैद
लखीमपुर खीरी। अनुसूचित जाति की किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एडीजे राहुल सिंह प्रथम ने दुष्कर्मी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही उस पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए विशेष लोक अभियोजक बृजेश पांडे ने बताया कि नीमगांव थाना क्षेत्र में रहने वाली एक अनूसूचित जाति की किशोरी 10 अप्रैल 2013 को जब सुबह 4:00 शौच के लिए गई, तभी ग्राम परसेहरा निवासी सद्दाम ने उसे दबोच लिया और धमकाते हुए दुष्कर्म किया। इसी दौरान खेत पर पहुंची किशोरी की भाभी ने ललकारते हुए आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह भाग निकला। अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता के अलावा सुमन देवी, कमला, छंगा, बशीर, बांकेलाल, कांस्टेबल सोनी गंगवार, कांस्टेबल अवधेश सिंह, रमाकांत मिश्र, केएम सिंह, डॉ. मीना, सीओ अखिलेश नारायण सिंह, डॉ वीके वर्मा सहित 11 गवाह पेश हुए थे। हालांकि, अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गई, लेकिन उसकी भाभी के बयान और पीड़िता के नाबालिग होने के तथ्य को रेखांकित करते हुए अदालत ने आरोपी सद्दाम को नाबालिग दलित किशोरी से दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया है। संवाद
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