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दुराचार और हत्या के मामले में दस साल की कैद, जुर्माना भी

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लखीमपुर खीरी। दुराचार व हत्या के मामले में एडीजे हरि प्रसाद ने आरोपी को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही अदालत ने वसूले गए जुर्माना की रकम में से 50 हजार रुपये पीड़िता की मां को दिए जाने का आदेश दिया है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमेश कुमार मिश्र ने बताया कि हैदराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम द्वारिकागंज निवासी 17 वर्षीय किशोर ने एक 15 वर्षीय किशोरी को छह जुलाई 2016 को उस समय दबोच लिया, जब वह अपने जानवरों को लेकर नाले पर पानी पिलाने गई थी। किशोरी की चीख पुकार कई लोगों ने सुनी थी, बाद में उसकी लाश नाले के पास मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी किशोरी के साथ हुई वहशी वारदात की गवाही दे रही थी। अदालत में आरोपी पर मुकदमा चला तो उसकी ओर से नाबालिग होने की बात कही गई कागजों के आधार पर उसे नाबालिग घोषित किया गया। एसआई मनोज यादव समेत कई लोगों ने गवाही दर्ज कराई। अदालत ने सुनवाई के बाद किशोर को दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई साथ ही उस पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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नाबालिग अपराधी को अधिकतम सजा
नाबालिग होने के बावजूद आरोपी को दस साल के कठोर कारावास की सजा अपने आप में अधिकतम सजा है, क्योंकि दिल्ली की निर्भया कांड में आरोपी के नाबालिग होने के कारण देश भर में मचे हल्ले और विरोध के बाद कानून में बदलाव करते हुए नाबालिग अपराधी को हत्या और दुराचार जैसे जघन्य मामले में अधिकतम दस साल के कारावास का बदलाव किया गया है, इससे पहले नाबालिग अपराधी को अधिकतम सजा तीन वर्ष की कैद ही होती थी।
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आईजी लक्ष्मी सिंह खुद कर रहीं थी मॉनीटरिंग
अदालत में मुकदमे में शासकीय पक्ष रखने वाले एडीजीसी रमेश मिश्र बताते है कि महिला अपराधों के प्रति संजीदगी दिखाते हुए इस मामले में खुद आईजी लक्ष्मी सिंह मॉनीटरिंग कर रहीं थी, समय समय पर एसपी विजय ढुल और एसआई आरआर यादव से भी इसी मामले में बातचीत होती रही, इसी का नतीजा है कि आरोपी को अधिकतम दंड मिल पाया।
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