लखीमपुर खीरी-गोला गोकर्णनाथ। बार काउंसिल ऑफ उप्र के आह्वान पर वकीलों ने विरोध प्रदर्शन कर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बनाने और मृतक अधिवक्ताओं के पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख मुआवजे की मांग की। आरोप लगाया कि वकीलों की सुरक्षा के मसले पर सरकार पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है।
गुरुवार को अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्यों से विरत रहने की जानकारी जिला जज को भेज दी गई। सो कोर्ट रूम में वकीलों की गैरमौजूदगी के चलते न्यायिक अधिकारियों ने भी अगली तारीखें देना मुनासिब समझा। इधर, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश वर्मा और महामंत्री अश्वनी कुमार मिश्र ने कहा कि वकीलों पर आपराधिक हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन आंख और कान बंद किए हुए है। अध्यक्षता करते हुए रमेश वर्मा ने अधिवक्ताओं को सुरक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की मांग की, इस दौरान राकेश शुक्ल, रमेश मौर्य, घनश्याम अग्निहोत्री, संजय कुमार, नवल किशोर श्रीवास्तव, कुलवंत सिंह, अफसर अली, इजराइल खां, विनोद वर्मा, नीरज मिश्र, राजेश कुमार, लोकश गुप्त सहित दर्जनो वकील मौजूद रहे।
उधर गोला गोकर्णनाथ में बार संघ चुनाव कमेटी के नेतृत्व में सेंट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और वकीलों ने प्रयागराज में वकील सना उल्ला खां, लखनऊ में वकील शिशिर त्रिपाठी की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। वकीलों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार अमित पांडे को सौंपा। इस मौके पर चुनाव कमेटी के अशोक गुप्ता, सुनीता मिश्रा, हरिनाम पांडे, संदीप अवस्थी, पंकज वर्मा, अजय यादव, लाल बिहारी वर्मा, केके शुक्ला आदि मौजूद रहे।
मोहम्मदी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रध्युम्न मिश्रा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जुलूस निकाल कर विरोध प्रकट किया और राज्यपाल को संबोधित तीन सूत्री मांग पत्र एसडीएम की गैर मौजूदगी में तहसीलदार विकासधर दुबे को सौंपा। इस मौके पर महामंत्री अनुज कुमार सिंह, योगेश त्रिवेदी, राजीव कुमार वर्मा, गोविंद खरे, मकरंद यादव, विवेक यादव, राजेश सिंह, कुलदीप सिंह, नरेन्द्र सिंह, अनिल श्रीवास्तव, श्याम वीर सिंह, मुकेश कश्यप, राजपाल राजू, आदित्य सिंह, राजकिशोर निराला समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
प्रदेश सरकार को जल्द उठाने होंगे कदम: अजय शुक्ल
यूपी बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान सदस्य अजय शुक्ल ने बताया कि वकीलों के खिलाफ आपराधिक हमलों का इजाफा हुआ है ऐसे में एडवोकेट प्रोटेक्टशन एक्ट बनाया जाना चाहिए और सुरक्षा के लिए वकीलों को प्राथमिकता से शस्त्र लाइसेंस दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा हर हमले के बाद कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने की बात होती है लेकिन नतीजा सिफर रहता है। उन्होंने दिवंगत वकीलों के परिवार वालों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग के साथ ही हत्यारोपियों के खिलाफ रासुका लगाने की मांग की।