लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिग के मामले में अलग-अलग पेश की गईं जमानत अर्जियों की सुनवाई में अदालत ने संयुक्त सुनवाई करने का निर्णय किया है। इसके तहत अलग अलग पेश हुई पांच आरोपियों की जमानत अर्जी की सुनवाई 20 दिसंबर को मुकर्रर की गई हैं। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी के विरोध के लिए एटीएस से रिपोर्ट तलब की है।
नेपाल राष्ट्र बैंक सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों को चूना लगाकर आतंकी गतिविधियों के लिए फर्जीवाड़ा किए जाने के मामले में जहां एक ओर जांच प्रक्रिया में नित नए तथ्य सामने आ रहे हैं, वहीं टेरर फंडिंग में जेल में बंद आरोपी संजय अग्रवाल ने अधिवक्ता मनीष सिंह के जरिए जमानत अर्जी पेश कर खुद को निर्दोष बताया और इस केस में सबसे पहले जमानत अर्जी पेश की थी। इसके बाद मुमताज ने भी अपने वकील लक्ष्मीशंकर शुक्ल के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल कर दी। इसी कड़ी में बरेली जेल में बंद सदाकत ने अपने वकील गुल मोहम्मद के जरिए जमानत अर्जी जिला जज की अदालत में पेश कर दी और खुद को निर्दोष बताया, सुनवाई के लिए तारीख नियत की ही जा रही थी कि इसी बीच फहीम और सिराजुद्दीन की ओर से अधिवक्ता इंद्रेश कटियार ने जमानत अर्जी लगाते हुए उनके मुवक्किलों को मामले में झूठा फंसाए जाने की बात कही। अभियोजन की ओर से डीजीसी अरविंद त्रिपाठी ने अलग-अलग पेश हुई जमानत अर्जियों की सुनवाई सामूहिक करने की बात कही। अदालत ने डीजीसी की मांग को मंजूर करते हुए पांचों जमानत अर्जियां की सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है।