लखीमपुर खीरी। वनकर्मियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देने के बाद सोमवार से गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 और फेज-2 में डीएनए सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया गया है। पहले दिन वनकर्मियों ने गैंडों के मल, मूत्र, बाल आदि के नमूने लेकर उन्हें संरक्षित किया। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बी प्रभाकर ने बताया कि डीएनए प्रोफाइल तैयार करने के लिए 90 दिन में दुधवा के सभी गैंडों के नमूने एकत्र कर डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजे जाएंगे। जिन गैंडों का नामकरण नहीं हुआ है, उनका नामकरण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि डीएनए सैंपल लेने के साथ ही गैंडों की गणना भी की जाएगी। मंगलवार से दुधवा में चल रहे गैँडा पुनर्वासन योजना फेज-1 और फेज दो में कैमरा ट्रैपिंग और हाथियों से भ्रमण कर भौतिक रूप से दिखने वाले गैंडों की गिनती की जाएगी। गैंडों की गणना के साथ उनकी विशिष्ट पहचान भी अंकित की जाएगी इसके लिए कैमरों और गैंडा विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी।