बिजुआ के चौखड़िया स्कूल में लैपटाप पर गूगल डाक्यूमेंट पर गुरु जी लेते हैं प्रवेश। संवाद
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बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। कोरोना संक्रमण के खौफ में शिक्षण कार्य बंद हुआ तो बच्चों की खिलखिलाहट से गुलजार रहने वाले स्कूलों में सन्नाटा छा गया, लेकिन इस बीच बेसिक शिक्षा से जुड़े तमाम शिक्षक अपने स्कूलों की सूरत संवारने में जुटे रहे। विदा होते साल 2020 में बझेड़ा गांव का सरकारी विद्यालय प्रदेश का उत्कृष्ट स्कूल और वहां के वीरेंद्र शुक्ला उत्कृष्ट शिक्षक बने। वहीं चौखड़िया गांव के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों ने भी नायाब मिसाल पेश की। इस स्कूल में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों को गूगल डाक्यूमेंट से फॉर्म भरने की सहूलियत दी गई।
जिस स्कूल में 400 में 200 बच्चे शारदा नदी के गोद में बसे मजरे से आते हैं, वह स्कूल अब प्रदेश का मॉडल स्कूल है। बझेड़ा गांव का यह स्कूल दुर्गम इलाके में है, जिसमें सीसीटीवी कैमरे, ई-क्लास, पब्लिक लाउडस्पीकर, आरओ, लाइब्रेरी, वाटर कूलर, कंप्यूटर लैब, सोलर इनवर्टर के साथ ही बच्चों के लिए आकर्षक रंगों से परिपूर्ण दीवारें और बाग है। इस स्कूल को राज्य स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार और अध्यापक वीरेंद्र शुक्ला को राज्य स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार मिल चुका है। शिक्षा के प्रति प्रधान अध्यापक की रुचि को देखते हुए उन्हें प्रदेश की कई समितियों में एसआरजी के रूप में नामित किया गया है।
कान्वेंट से कम नहीं चौखड़िया प्राथमिक विद्यालय
शासन ने तमाम सरकारी स्कूलों को इंगलिश मीडियम घोषित किया है, लेकिन चौखड़िया गांव का प्राथमिक विद्यालय हिंदी माध्यम होने के बावजूद किसी कान्वेंट से कम नहीं है। यहां के प्रधानाध्यापक प्रवीन द्विवेदी विद्यालय में प्रवेश के लिए नायब तरीका निकाला, जिससे कोरोना काल में बच्चों और अभिभावकों को स्कूल भी न आने पड़े और उन्हें प्रवेश भी मिल जाए। इसके लिए गूगल डॉक्स पर प्रवेश फॉर्म अपलोड कर उसका लिंक शेयर कर दिया ताकि उस फॉर्म भरकर बच्चे स्कूल में प्रवेश ले सकें। लॉकडाउन में भी प्रवीन और उनका स्टाफ ने घर-घर जाकर बच्चों का होमवर्क चेक किया।