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सिस्टम की मार से बेहाल कोरोना संक्रमित

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मिथुन - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमितों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। घरवाले इलाज कराने के लिए संक्रमितों को लेकर दर दर भटक रहे हैं। उधर, जिला प्रशासन के अफसरों से लेकर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी एक दूसरे का नंबर देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। एक तरफ शनिवार को जिला प्रशासन ने दावा किया था कि उसके पास 48 घंटों तक के लिए पर्याप्त आक्सीजन है वहीं रविवार को कई कोविड मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए अपना आक्सीजन का सिलिंडर लाने के लिए कहा गया।
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मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी 50 वर्षीय लक्ष्मी देवी दो दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती र्हुइं थीं। महिला वार्ड में इलाज के दौरान उनकी कोरोना जांच हुई। रिपोर्ट आने से पहले ही महिला के ऑक्सीजन स्तर में सुधार होने के कारण अस्पताल से उसकी छुट्टी कर दी गई। बाद में जब कोरोना की जांच रिपोर्ट आई तो महिला पॉजिटिव निकलीं। रविवार को अचानक ऑक्सीजन लेवल घटने पर बेटे के साथ महिला फिर से जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचीं। जहां मौजूद स्टाफ ने भर्ती करने से मना करते हुए 108 एंबुलेंस पर फोन करने को कहा। मां की हालत बिगड़ती देख पुत्र मिथुन ने एसीएमओ, सीएमओ और फिर डीएम के सीयूजी नंबर पर फोन किया। सीएमओ का सीयूजी नंबर एसीएमओ के पास और पर्सनल नंबर बंद मिला। मिथुन ने बताया कि जिन लोगों से बात पर हुई सभी लोग एक दूसरे का नंबर देकर बात करने की नसीहत देते रहे। यहां तक की डीएम साहब के सीयूजी नंबर पर फोन किए जाने पर सीएमओ का नंबर दिया गया। मिथुन ने बताया कि एंबुलेंस आने पर जब दोबारा डीएम साहब के नंबर पर बात हुई तो उन्होंने जगसड़ में भर्ती कराने की बात कही। मिथुन का कहना है कि पहले जब जगसड़ में भर्ती करने की बात हुई तो स्टाफ ने ऑक्सीजन की व्यवस्था स्वयं करने को कहा। मगर, डीएम साहब से दोबारा बात करने के बाद जब कोविड अस्पताल पहुंचे तो मां को भर्ती कर ऑक्सीजन उपलब्ध करा दी गई। संवाद
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