लखीमपुर खीरी। कोरोना पॉजिटिव मिलने पर संक्रमित के घर के आसपास कंटेन्मेंट जोन बनना है। मगर, जिम्मेदार इसको लेकर भेदभाव कर रहे हैं। जिन संक्रमितों के इर्दगिर्द रसूखदार रह रहे हैं वहां पर कंटेन्मेंट जोन बनाने में लेटलतीफी होती है। जबकि शहर में सामान्य आदमी के पॉजिटिव मिलने पर उसकी पूरी गली तो वहीं देहात में पूरा गांव सील कर दिया जाता है। ऐसी बानगी जिला मुख्यालय सहित अन्य इलाकों में देखी जा सकती है। पंजाबी कॉलोनी में संक्रमित के पड़ोस में रसूखदार का घर होने के कारण पांच दिन बाद कंटेन्मेंट जोन बनाया गया। वहीं गोला की पंजाबी कॉलोनी में माननीय का घर होने के कारण सिर्फ सीमित दायरे में बैरिकेडिंग की गई।
डीसी रोड पर मकान किया सील
सत्तापक्ष के घर में दो लोगों के संक्रमित मिलने पर जिम्मेदारों ने सिर्फ आवास के आगे करीब दो मीटर में ही बैरिकेडिंग की। जबकि अन्य मोहल्लों में पूरी की पूरी गली सील कर दी गई। बैरिकेडिंग करने वालों का कहना है कि निर्धारित परिधि लेने पर डीसी रोड बंद हो जाती, जो मुमकिन नहीं है, क्योंकि इसी रोड से आला अधिकारी निकलते हैं।
संक्रमित मिलने पर पूरा गांव सील
ईसानगर ब्लॉक के गांव काजीपुर में संक्रमित मिलने पर महकमे के लोगों ने पूरा गांव ही सील कर दिया। लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगाते हुए सुरक्षाकर्मी बिठा दिया। सीएचसी प्रभारी डॉ. बीके स्नेेही ने बताया कि पॉजिटिव मिलने पर परिवार व संपर्क में आने वाले 78 लोगो के सैंपल जांच को गए हैं। सुरक्षा को लेकर पूरा गांव सील करा दिया है।
माननीय को दिक्कत न हो इसलिए कम कराई बैरिकेडिंग
गोली की पंजाबी कॉलोनी में संक्रमित के घर से कुछ ही दूर माननीय का घर है। इसलिए बैरिकेडिंग का दायरा सीमित रखा गया, जिससे उन्हें आने जाने में दिक्कत न हो। जबकि कोविड टीम प्रभारी डॉ. गणेश कुमार बताते हैं कि कंटेन्मेंट जोन का एरिया 200 मीटर होना चाहिए। संक्रमित के मकान के पास की गलियां बंद करना जरूरी होता है।
संक्रमित के मकान से कंटेन्मेंट जोन का ढाई सौ मीटर एरिया निर्धारित है। लोगों का आना जाना प्रतिबंधित होता है। वहां रहने वालों के लिए जरूरी सामान के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था की जाती है।
-अखिलेश यादव, एसडीएम गोला