बांकेगंज। हरियाणा के सोनीपत जिले के गोरड गांव में बांकेगंज कस्बा से सटे बांकेपुर गांव के आठ मजदूर होली के दरम्यान वहां के किसानों के खेतों में गन्ना छिलाई करने गए थे। लॉकडाउन के बाद काम न मिलने से ये मजदूर कमाई किए गए रुपयों से किसी तरह समय गुजारते रहे। घर वापसी के लिए प्रशासन से न कोई सहयोग मिला न ही साधन। ऐसी स्थिति में इन सभी मजदूरों ने पैदल ही घर आने का फैसला लिया। चार मई को मौका पाकर एक ही गांव के निवासी आठों मजदूर अपने घर के लिए पैदल निकल पड़े।
बांकेपुर गांव निवासी मजदूर मंगल सिंह, डालचंद्र, श्रीराम, विपिन, भीमसेन, दीपक, मोतीलाल और घनश्याम गोरड गांव से खेतों और जंगलों से होते हुए रात दिन पैदल चलकर एक हफ्ते बाद रविवार शाम अपने गांव पहुंचे। अपनी कहानी बताई और भूखे प्यासे पैदल चलकर घर आने की बात कही। लोगों ने प्रधान वीरेंद्र भार्गव, कोरोना आर्थिक सहायता एवं जागरूकता समूह के मेंबरों नीतेश कुमार, नावेद खां आदि सहित बांकेगंज युवा सेना के संयोजक शाश्वत मिश्रा को दी। उन्होंने इन मजदूरों को गांव के बाहर बने स्कूल में ठहराकर चौकी इंचार्ज अनेक पाल सिंह समेत एसडीएम गोला अखिलेश को सूचित किया। एसडीएम के निर्देश पर सीएचसी के डॉक्टरों की टीम ने इन मजदूरों का चेकअप किया। प्राथमिक जांच में किसी मजदूर में कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। इन मजदूरों ने बताया कि हम लोग मजदूरी करने हरियाणा गए हुए थे। लेकिन ऐसी मुसीबत में फंस गए कि घर मिलना दूर हो गया। उन्होंने बताया कि जान जोखिम में डालकर पैदल ही घर आने का फैसला लिया। बहरहाल अपने घर आकर सभी खुश हैं।
पंजाब से साइकिल से आए सात मजदूर
निघासन लॉकडाउन के दौरान पंजाब में फंसे सात मजदूर साइकिल से चलकर निघासन के ढखेरवा के नानकार में पहुंचे। वहां पर उनको प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन किया गया है। मजदूरों ने बताया कि साधन न मिलने के कारण वह साइकिल से 10 दिन पहले पंजाब से चले थे।