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संकट की घड़ी में समाज सेवा ही खाकी का असली फर्ज

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लखीमपुर खीरी। कोराना.. शब्द सुनते ही आम लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जिन इलाकों में कोरोना संदिग्ध या कोरोना संक्रमित मिले, लोग उधर से गुजरना तक नहीं चाहते, लेकिन पुलिस न सिर्फ खतरा उठा रही है, बल्कि लॉकडाउन का पालन कराने के लिए सड़कों पर दिन रात एक किए है। गरीबों, बेसहारों को खाना पहुंचाकर उनकी भूख मिटाती है। कोरोना से जंग लड़ने वाले खाकी के योद्धा कहते हैं कि संकट की इस घड़ी में समाज की सेवा करना ही तो असली फर्ज है। ऐसे नाजुक वक्त में हम अपने बारे में सोचेंगे तो पब्लिक की सुरक्षा और मदद कौन करेगा। अपनों के पास न पहुंचने का मलाल तो है, लेकिन एक परिवार ये समाज भी तो है, जिसकी मदद करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
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ड्यूटी का फर्ज निभाना बेहद जरूरी
सदर कोतवाली के एसएसआई शिव प्रकाश पांडेय बताते हैं कि वर्तमान समय में जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। घर जाने का मन तो बहुत है, लेकिन इस दौर में घर जाने के बजाय ड्यूटी का फर्ज निभाना बेहद जरूरी है।
समाज की सेवा पहला दायित्व
कोतवाली तिकुनियां की पुलिस चौकी बेलरायां इंचार्ज योगेश तेवतिया बताते हैं कि साले की शादी थी, लेकिन नहीं जा पाया। परिवार की जिम्मेदारी के साथ समाज सेवा का भी दायित्व हैं, उसे ही निभा रहा हूं।
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देश की सेवा सर्वोच्च सेवा
महिला सिपाही सारिका चौहान कहती हैं कि दो महीने से घर नहीं गई हूं। इन दिनों देश संकट के दौर से गुजर रहा है। इसलिए समाज व देश की सेवा सर्वोच्च है। उसे ही पूरा कर रही हूं।
देश के सामने आया संकट तो बदला फैसला
महिला सिपाही सरिता तोमर कहती हैं कि संकट की इस घड़ी में लोगों की मदद करना जरूरी है। घर पर तीन बहने, दो छोटे भाई हैं। घर जाने वाली थी। इसी बीच देश के सामने संकट खड़ा हो गया, सो घर जाने का फैसला बदल दिया।
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