लखीमपुर खीरी। विश्व कुष्ठ रोग दिवस शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस रोग को लेकर आज भी कई तरह की भ्रांतियां व्याप्त हैं। इस कारण मरीज समय पर उपचार नहीं करा पाते। इससे इस रोग के बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने से दिक्कत बढ़ सकती है। सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में कुष्ठ रोग के लिए चिकित्सक तैनात हैं। जिले में इस समय 275 कुष्ठ रोगी हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार-पांच नए व पुराने कुष्ठ रोग के मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि कुष्ठ रोग में दर्द नहीं होता है, इसलिए लोग लापरवाही कर जाते हैं। ऐसे में उनकी समस्या बढ़ जाती है।
लापरवाही करने पर मरीज के उस हिस्से पर सुन्न व अपंगता का खतरा भी बना रहता है। कुष्ठ रोग धीरे-धीरे विकसित होता है। इसके संपर्क में आने के बाद लक्षण विकसित होने में कई साल लग जाते हैं। कोई भी लक्षण दिखने पर उचित चिकित्सक से ही परामर्श लेना चाहिए।
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ये हैं लक्षण
-हल्के गहरे रंग के निशान पड़ जाते हैं।
-निशान की जगह पर खुजली नहीं होती है। फफोले पड़ जाते हैं।
-कभी-कभी गांठ भी पड़ जाती है।
-हाथों, पैरों और त्वचा के अन्य क्षेत्रों में सुन्नता हो सकती है।
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आज से 13 फरवरी तक चलेगा जागरूकता अभियान
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि कुष्ठ रोगियों की जांच के लिए जिला अस्पताल सहित गोला सीएचसी में अलग से एक एलटी की तैनाती की गई है। सभी सीएचसी पर चिकित्सक व अन्य स्टाफ ऐसे रोगियों को चिन्हित कर निशुल्क दवाएं देता है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता को लेकर जिले में अभियान भी चलाया जाएगा। इससे लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर किया जाएगा।