त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर शासन-प्रशासन तैयारियों में जुटा है। तो वहीं गांवों में प्रधानी पर कब्जा करने के लिए सियासत गर्माने लगी है। डीएम, सीडीओ और डीपीआरओ कार्यालय में प्रधानों के खिलाफ शिकायतों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। इन शिकायतों की जांच कराने में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर होने से विभागीय अधिकारी अवशेष कार्यों को पूरा करने की मशक्कत से जूझ रहे हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2010 में हुआ था, जिसमें दो नवंबर 2010 को प्रधानों का शपथ ग्रहण कराया गया था। इस लिहाज से अक्तूबर 2015 तक प्रधानोें का कार्यकाल शेष है। शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायतों का परिसीमन कराया जा चुका है, जबकि वार्डों के परिसीमन का कार्य जारी है। हालांकि चुनाव कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है। वहीं सात माह की अवधि में कुछ प्रधान भी उपलब्ध बजट को खुर्दबुर्द करने में जुट गए हैं तो ग्रामीणों ने पूरे कार्यकाल के दौरान प्रधानों की कागुजारियों की शिकायत करते हुए धांधली के आरोप लगाए हैं। सबसे अधिक शिकायतें डीएम के दफ्तर पहुंच रही हैं। इसके अलावा सीडीओ और डीपीआरओ कार्यालय में भी लोग शिकायत कर जांच की मांग कर रहे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि शपथ पत्र पर प्राप्त होने वाली शिकायतों की जांच अधिकारियों को नामित कर कराई जाती है। जबकि सादे कागज पर मिलने वाली शिकायतों को फौरी तौर पर निपटाया जा रहा है। डीपीआरओ कार्यालय में अभी करीब दो दर्जन प्रधानों के खिलाफ शपथ पत्र पर शिकायतें जांच के लिए लंबित हैं। इसके अलावा सादे कागजों पर शिकायतों की संख्या सैकड़ों में है।
--
ब्लाक धौरहरा की ग्राम पंचायत करौंहा निवासी महेंद्र कुमार तिवारी समेत ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान के खिलाफ शपथ पत्र देकर डीएम से जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने महिला प्रधान के पति पर फर्जी हस्ताक्षर करने, खडंजा निर्माण में पीली ईंट लगाने, पुलिया निर्माण में अनियमितता आदि आरोप लगाए हैैं।
--
कुंभी ब्लाक की ग्राम पंचायत ककलापुर निवासी सर्वेश कुमार आदि ने डीएम को शिकायती पत्र दिया है, जिसमें ग्राम प्रधान के खिलाफ इंदिरा आवास आवंटन में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान ने लाभार्थियों से धन लेकर निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रधान ने सामग्री नहीं दी और न ही धन लौटाया। इससे लाभार्थियों के आवास नहीं बन सके हैं।