नगर स्थित शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1935 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जमुनालाल बजाज ने की थी। तब उन्होंने कंपनी का नाम हिंदुस्थान शुगर मिल्स लिमिटेड रखा था। कई वर्ष बाद यहां आसवनी (डिस्टलरी) यूनिट भी शुरू की गई थी। इस मिल में नागरिकों और किसानों के भी शेयर थे, जो धीरे धीरे कम होकर समाप्त हो गए। वर्षों बाद इस मिल का नाम बदल कर बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड हो गया, लेकिन यह नाम भी वर्ष 2015 में बदल कर बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड कर दिया गया। इस शुगर यूनिट का नाम साइन बोर्ड पर तो बदल गया लेकिन कागजों में नहीं बदला गया। शुगर यूनिट ने इस गन्ना पेराई सत्र में डेढ़ माह तक बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड के नाम से गन्ने की खरीद की। इधर 10 जनवरी से गन्ना खरीद तौल पर्ची पर बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड छपा देखकर किसानों में चर्चा के साथ संशय उत्पन्न हो गया है। किसानों का कहना है कि जब कंपनी का नाम बीते पेराई सत्र के बाद ही बदल दिया गया था तो उन्हें बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड के नाम से सट्टे के कलेंडर क्यों दिए गए और इसी नाम से इतने समय तक गन्ने की खरीद क्यों की गई। क्या यह कंपनी एक्ट का उल्लंघन नहीं है?
डीएम कार्यालय को नहीं मालूम नाम
विश्व प्रसिद्ध चीनी मिल का नाम तो बदल गया, किंतु डीएम कार्यालय को बदले हुए नाम की जानकारी नहीं लगी, इसलिए डीएम कार्यालय अब तक पुराने नाम से ही आदेश जारी करता रहा।
डीएम किंजल सिंह ने पांच जनवरी 2016 को अपने आदेश की प्रतिलिपि एसडीएम गोला, सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति, गन्ना निरीक्षक एवं सहायक चीनी आयुक्त सीतापुर, उप गन्ना आयुक्त लखनऊ, गन्ना आयुक्त उप्र लखनऊ एवं बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के अध्यासी को प्रेषित की थी, जिसमें अध्यासी बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड इकाई गोला गोकर्णनाथ लिखा गया था। पत्रांक 5411/सी/क्रय/गमूभु 2015-16 को जारी आदेश में बजाज हिंदुस्थान लि इकाई द्वारा उत्पादित समस्त चीनी स्टाक चीनी मिल अध्यासी के साथ साथ संयुक्त प्रभार में रखे जाने के लिए एसडीएम गोला एवं सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड गोला को अधिकृत किया गया था। बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड, गोला गोकर्णनाथ-खीरी के यूनिट हेड ओमपाल सिंह ने बताया कि पुराना नाम बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड था। अब नाम बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड है। तौल पर्चियों पर प्रिंटिंग में शुगर शब्द छूट गया होगा।