दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में सर्दियों के सीजन में आते हैं विदेशी मेहमान, अब कर रहे हैं घर वापसी
दुधवा के जलाशयों का भ्रमण कर प्रवासी पक्षियों के कोलाहल का लुत्फ उठाने का मन बनाया है तो अब और देर न करें क्योंकि शीतकाल में दुधवा के दुर्गम जंगलों में जलक्रीड़ा कर पर्यटकों के उत्साह को दूना करने वाले मेहमान परिंदे अब मौसम में हो रहे बदलाव के साथ ही अपने वतन को लौटने लगे हैं।
जैव विविधता के जरिए विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना चुके दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में वैसे तो विभिन्न प्रजातियों के पशु पक्षी हैं लेकिन शीतकाल में बर्फीले क्षेत्रों के अलावा चीन और साइबेरिया समेत उत्तर में ठंड के मैदानों से अनेक प्रवासी पक्षी आते हैं। इन प्रवासी पक्षियों की खास बात यह है कि शीतकाल में यहां प्रवास के बाद वे फरवरी माह से अपने वतन को लौटना शुरू कर देते हैं। मार्च के अंत तक ये अपने देश लौट जाते हैं।
पार्क प्रशासन भी इन प्रवासी परिंदों की मेहमाननवाजी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता। एक-दो बार इन प्रवासी परिंदों के शिकार के मामले प्रकाश में आने के बाद पार्क प्रशासन अब इनके दुधवा में प्रवेश करने के समय से पहले ही सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त करते हुए प्रत्येक बीट में चार चार वॉचरों की तैनाती कर देता है ताकि इन प्रवासी परिंदों पर शिकारियों की काली छाया न पड़ने पाए और प्रवासी परिंदे दुधवा के शांत और उन्मुक्त वातावरण मे अठखेलियां कर पर्यटकों के उत्साह को दूना कर उनका ध्यान अपनी ओर खींच लें। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के बेलरायां रेंज के रेंजर एमके शुक्ला ने बताया कि अत्यधिक गर्मी पड़ने पर प्रवासी पक्षी अपने वतन को लौट जाते हैं। इसी के चलते मौसम में बदलाव होते ही प्रवासी परिंदों की घर वापसी शुरू हो गई है।