केला और पपीता 10 डिग्री सेंटीग्रेट से कम तापमान होने से ही उनकी वृद्धि प्रभावित होने लगती है, पौधे झुलसे हुए दिखाई देते हैं। ठंड गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है लेकिन पाले से बचाव जरूरी है। सरसों, गेहूं, चावल, आलू और मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने के लिए सल्फर (गंधक) का छिड़काव करने से रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है और पाले से बचाव के अलावा पौधे को सल्फर तत्व भी मिल जाता है।
फसलों में रोग और कीटों का भी बढ़ सकता है प्रकोप
कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि ठंड के मौसम में तापमान गिरने और पाला गिरने से फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है। वातावरण में आद्रता बढ़ने से रबी की फसलों में कीट और रोग के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। आलू में पछेती झुलसा और तिलहनी फसलें माहू और पाला से प्रभावित हो रही हैं। ऐसे मौसम में गेहूं की फसल, गहुंसा, जंगली जई, चौड़ी पत्ती यानि बथुआ, अकरा आदि खरपतवार हो सकते हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों से फसल सुरक्षा के लिए सलाह लें। उनकी सलाह के अनुसार और कीटों और खरपतवार नाशक दवाओं का इसतेमाल करें ताकि मौसम की मार से फसलों को बचाया जा सके।