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Lakhimpur Kheri: दो दिन की राहत के बाद फिर बढ़ेगी आफत, डरा रही मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी

Sun, 15 Jan 2023 06:11 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 15 जनवरी के बाद से अगले पांच छह दिनों तक भीषण शीतलहर चलेगी। बताया जा रहा है कि यह शीतलहर पहले से ज्यादा भयावह होगी। तापमान में गिरावट होने से कड़ाके की ठंड अभी और कंपाएगी। 
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धूप खिलने से मौसम हुआ खुशनुमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुरी खीरी में पिछले दो दिनों से मौसम साफ रहने और धूप खिलने से मौसम खुशनुमा हो गया है। हालांकि सुबह शाम सर्द हवाओं के चलने से गलन बनी हुई है। फिर भी गुनगुनी धूप काफी राहत दे रही है। शीतलहर से अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन पटरी पर लौट आया है। लेकिन 15 जनवरी से मौसम फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 15 जनवरी के बाद से अगले पांच छह दिनों तक भीषण शीतलहर चलेगी। बताया जा रहा है कि यह शीतलहर पहले से ज्यादा भयावह होगी। तापमान में गिरावट होने से कड़ाके की ठंड अभी और कंपाएगी। 

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शनिवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 06 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 09 डिग्री सेल्सियस था। शनिवार को शुक्रवार की अपेक्षा न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। जिले के कुछ हिस्सों में बादल भी छाए रहे और बर्फीली हवाएं जारी रहीं। पसगवां, उचौलिया, जेबीगंज में शीतलहर चली। पारे में गिरावट को लोग मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी से जोड़ कर देख रहे हैं, जिसके चलते 14 जनवरी से ही तापमान में गिरावट आना शुरू हो गया है। 

पाला फसलों के लिए हो सकता है घातक

कृषि विज्ञान केंद्र लखीमपुर के कृषि वैज्ञानिक पीके विसेन ने बताया कि पाला से बचाने के लिए खेत में हल्की-हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान कम नहीं होगा। नर्सरी के पौधों एवं सब्जी वाली फसलों को लो कॉस्ट पॉली टनल में उगाना अच्छा रहेगा। इन्हें पॉलिथीन अथवा पुवाल से ढक देना चाहिए। वायुरोधी बोर की टटियां को हवा आने वाली दिशा की तरफ से बांधकर क्यारियों के किनारों लगाने से पाले और शीतलहर से फसलों को बचाया जा सकता है। 

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केला और पपीता 10 डिग्री सेंटीग्रेट से कम तापमान होने से ही उनकी वृद्धि प्रभावित होने लगती है, पौधे झुलसे हुए दिखाई देते हैं। ठंड गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है लेकिन पाले से बचाव जरूरी है। सरसों, गेहूं, चावल, आलू और मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने के लिए सल्फर (गंधक) का छिड़काव करने से रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है और पाले से बचाव के अलावा पौधे को सल्फर तत्व भी मिल जाता है। 

फसलों में रोग और कीटों का भी बढ़ सकता है प्रकोप 

कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि ठंड के मौसम में तापमान गिरने और पाला गिरने से फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है। वातावरण में आद्रता बढ़ने से रबी की फसलों में कीट और रोग के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। आलू में पछेती झुलसा और तिलहनी फसलें माहू और पाला से प्रभावित हो रही हैं। ऐसे मौसम में गेहूं की फसल, गहुंसा, जंगली जई, चौड़ी पत्ती यानि बथुआ, अकरा आदि खरपतवार हो सकते हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों से फसल सुरक्षा के लिए सलाह लें। उनकी सलाह के अनुसार और कीटों और खरपतवार नाशक दवाओं का इसतेमाल करें ताकि मौसम की मार से फसलों को बचाया जा सके। 
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