ठंड बढ़ने के साथ ही बिजली कटौती बढ़ गई है। जिसकी वजह से शहरी क्षेत्र में पहले तीन चरणों में बिजली कटौती के बजाए अब चार चरणों में नौ से 10 घंटे बिजली काटी जा रही है। रोस्टर में संशोधन न होने बावजूद इमरजेंसी कटौती का समय भी बढ़ गया है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं बिजली अधिकारी इसे पंचायत चुनाव का असर बता रहे हैं।
मौजूदा समय में बिजली कटौती गर्मी के मौसम के बराबर पहुंच गई है। बिजली लोड कम होने के बाद भी उपकेंद्रों पर ट्रिपिंग की समस्या सामने आ रही है। इसके अलावा इमरजेंसी कटौती की वजह से भी बिजली सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है। खासकर दिन और रात में कई-कई घंटे की इमरजेंसी कटौती लोगों पर भारी पड़ रही है।
बिजली अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, बिजली लाइनों पर लोड बढ़ेगा। इससे न सिर्फ ओवरलोडिंग से दिक्कत आएगी बल्कि बिजली लाइनें भी टूटेंगी। नमी के कारण ट्रांसफार्मरों पर भी असर पड़ेगा। इस संबंध में अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा का कहना है कि नौ घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
जिन क्षेत्रों में चुनाव है या स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं, वहां संबंधित फीडरों को नियमित रूप से बिजली सप्लाई करने का निर्देश है। जिसका असर शहर की बिजली सप्लाई पर पड़ रहा है। लेकिन यह स्थिति मतगणना यानि 13 दिसंबर तक रहेगी। इसके बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के मुताबिक बिजली सप्लाई की जाएगी। ईई ने बताया कि जल्द ही बिजली सप्लाई में सुधार होगा।