शिक्षण कक्ष की छत जिससे दिखाई दे रही सरिया-संवाद
पसगवां। क्षेत्र के केन ग्रोवर्स इंटर कॉलेज के करीब 20 कमरे जर्जर हो चुके हैं। मरम्मत और रखरखाव की अनदेखी से भवन गिरने के कगार पर पहुंच गया है। इन्हीं जर्जर कमरों में बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।
इससे हर समय बच्चों के जीवन पर खतरा मंडराया करता है। स्कूल किसानों की अंश पूंजी से बनाया गया था। विद्यालय में करीब दो हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 20 साल से ज्यादा का समय बीतने को है, लेकिन कालेज के भवन की मरम्मत और रंग-रोगन का कार्य नहीं हो सका। किसानों की अंश पूंजी से केन ग्रोवर्स इंटर कालेज 90 के दशक में बना था। कुछ साल बाद प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के मध्य विवाद बढ़ा तो मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। साल 1995 से कालेज में एकल संचालन की व्यवस्था लागू की गई। वहीं प्रबंधक के संचालित बैंक खातों पर रोक लगा दी गई थी। तब से कालेज के शिक्षण कक्षों की न तो मरम्मत हो सकी और न कोई विकास कार्य हो पाया।
कालेज के सूत्र बताते हैं कि विकास निधि में लगभग 85 लाख रुपये जमा हैं, यह रकम प्रतिमाह बढ़ती जा रही है। इसके अलावा प्रबंधक द्वारा संचालित अन्य निधियां भी सीज हैं। स्कूल में दो हजार के आस पास बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल कक्षा छह से 12 तक संचालित किया जाता है। हाल यह है कि कम जर्जर हालत वाले कमरे में भी मानक से अधिक छात्र-छात्राओं को बैठाया जाता है। जर्जर होने के चलते कक्षों में बरसात के दौरान पानी टपकता रहता है। छात्र-छात्राएं भय के माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं।
कॉलेज के प्रधानाचार्य हरीश चंद्र का कहना है कि उन्होंने जर्जर और गिरने की कगार पर पहुंचने वालों कमरों की लिखित जानकारी डीआईओएस को कई बार दी है। डीआईओएस डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। स्टे होने के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है। हालांकि उन्होंने प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्ति किए जाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे हैं।