ओयल। जिला अस्पताल में कई मुख्य दवाओं की कमी है। वहीं अस्पताल प्रशासन का दावा है कि औषधि भंडार में करीब 367 प्रकार की दवाओं का स्टॉक है। बावजूद इसके कुछ डॉक्टरों की मरीजों के पर्चों पर लिखी गईं दवाएं केवल अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं।
दूर-दराज के इलाकों से गरीब तबके के लोग जिला अस्पताल में बेहतर इलाज की आस लिए पहुंचते हैं। पहले तो इन्हें पर्चा, चिकित्सक, जांच की लंबी-लंबी लाइनों से गुजरना पड़ता है। इसके बाद जब पर्चे पर लिखी गई दवा लेने का नंबर आता है तो औषधि काउंटर पर दवा न होने की बात कही जाती है। मजबूरी में मरीजों को दवा बाहर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती है।
ये दवाएं नहीं मिलतीं
पीएमसी आईड्राॅप, मेथाईल कोबालामिन टैबलेट (नसों के दर्द के लिए), संक्रमण के लिए एजिथ्रोमाइसिन, एमॉक्सी 625, फ्रूसेमआइड (यूरिन पास होने की दवा) दवाएं औषधि भंडार में ही नहीं। वहीं इसके अलावा दर्द के लिए काइमोराल्ड फोर्ट, मानसिक रोग की एक्लोस्परोम व टॉस ओरल पेस्ट सहित कई अन्य दवाएं मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीद कर अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
मरीजों ने बताई अपनी-अपनी परेशानी
गिरने से चोट लग गई थी। पेट व पसलियों में दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने दवाई लिखी है। अन्दर नहीं मिली, मेडिकल पर लेने जा रहा हूं।- मुख्तार, ओयल
गले में दर्द हो रहा है। दूरी मंजिल पर डॉक्टर को दिखाया है। डॉक्टर ने पर्चे पर दवाई लिखी है, जो अस्पताल से नहीं मिली है। बताया है मेडिकल स्टोर पर मिलेगी। -तसव्वुर खान, सैनखेड़ा अमीरखनपुरवा
जीभ में छाले होने के चलते दवा लेने जिला अस्पताल आया था। डॉक्टर ने दवाएं पर्चे पर लिखी थी। लंबी लाइन में लगने के बाद जब नंबर आया तो पर्चे पर लिखी एक दवा यहां नहीं मिली, बाहर मेडिकल से लेने जा रहा हूं। - हरिपाल, परसेहरा सीतापुर
न्यूरो की मरीज हूं। सिर में अक्सर दर्द बना रहता है। डॉक्टर से कहा था अच्छी दवाई लिख दो, मेडिकल स्टोर पर खरीदने जा रही हूं। -किरन, जमुनिया ओयल
अस्पताल में 367 तरह की दवाएं हैं। कार्पोरेशन में एक्सपायरी की वजह से कुछ दवाएं कम हैं। वह दवाएं मरीजों को जनऔषधि केंद्रों पर मिल जाती हैं। -डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल
मुख्तार
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