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महज मोबाइल में ही कैद होकर रह गया प्रहरी एप

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लखीमपुर खीरी। पुलिसिंग को मजबूत और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए प्रहरी एप लांच किया गया है। एप के जरिए घटनाओं, हादसों आदि पर सीधे नजर रखना है। जिले में अधिकतर पुलिसकर्मियों के मोबाइल में एप डाउनलोड नहीं है तो कुछ स्थानों पर नेटवर्क की दिक्कत भी आ रही है। इससे यह एप मोबाइल में कैद होकर रह गया है।
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प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस महकमे ने प्रहरी एप जारी किया था। इसके पीछे शासन की मंशा थी कि सिपाही से लेकर डीजीपी तक एक दूसरे से सीधे जुड़ सकें। साथ ही घटनाओं से संबंधित जानकारियां मौके से अधिकारियों तक त्वरित भेजी जा सकें। एप में सिपाही और एसपी से लेकर पुलिस महानिदेशक तक को संदेश भेजने का विकल्प है। लूट, हत्या व डकैती जैसे गंभीर अपराध के मामले में सिपाही मौके पर जाकर फोटो और संदेश एप पर लिखकर जघन्य विकल्प पर क्लिक कर संबंधित थाने के प्रभारी निरीक्षक से लेकर डीजीपी तक भेज सकता है। पुलिस महकमे के सूत्रों के मुताबिक जिले में आधे से अधिक सिपाहियों और दरोगाओं ने इस एप को इंस्टाल ही नहीं किया है। जिन्होंने इंस्टॉल भी किया तो वह इसका उपयोग न के बराबर कर रहे हैं।
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एप में सूचना देने के हैं चार विकल्प
प्रहरी एप में सिपाही को सूचना देने के लिए चार विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प रिपोर्ट है। इसमें सिपाही को घटना के प्रकार, घटनास्थल का वीडियो और फोटो अपलोड करना है। दूसरे विकल्प में सिपाही को यह बताना है कि उसकी ड्यूटी कहां है। अगर वह धरना प्रदर्शन या कानून व्यवस्था ड्यूटी पर है तो उसे ऑपशन में फीड करना है। आपात स्थिति में किसी भी तरह का मेसेज अधिकारियों को देने के लिए संदेश विकल्प है। चौथे विकल्प जियो टैगिंग के जरिए बीट के सभी प्रमुख स्थानों को अपडेट करना है।
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एप चलाने में नेटवर्क की भी आ रही दिक्कत
प्रहरी एप के ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए हर थाने की सभी बीट की जियो टैगिंग व जियो फेंसिंग से जोड़ा गया है। एप में सिपाही को अपनी बीट में दिनभर होने वाले आयोजन, घटनाओं, प्रमुख स्थानों, बीट से जुड़े अपराधियों, संवेदनशील और अति संवदेनशील स्थानों की जानकारी देना है। सूत्रों के मुताबिक कुछ जगहों पर जियो टैंगिंग और जियो फेंसिंग का काम तकनीकी दिक्कत से पूरा नहीं हो सका है। चंदनचौकी, बेलरायां, गौरीफंटा तिकुनियां सहित कई जगहों पर नेटवर्क की दिक्कत के कारण एप शोपीस बना है।
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प्रहरी एप का रिस्पांस काफी अच्छा आया है। कई जगहों पर नेटवर्क की दिक्कत आ रही है, इसलिए एप उन जगहों पर चल नहीं पा रहा है। अगर किसी पुलिसकर्मी के मोबाइल में एप इंस्टाल नहीं है तो इसकी जानकारी कर उसे तत्काल इंस्टाल कराया जाएगा।
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-विजय ढुल, एसपी
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