नेपाल बॉर्डर पर कटान करती मोहाना नदी। संवाद
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लखीमपुर खीरी। जनपद की तहसील पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर में बारिश सीजन में घाघरा और शारदा नदियों में उफान से आने वाली बाढ़ और फिर जलस्तर कम होने पर नदियों के कटान से हजारों किसानों की जिंदगी तबाह हुई है। बाढ़ का खतरा कम हुआ है, लेकिन घटते जलस्तर से नदियां तेजी से कटान कर रही हैं। इससे गांव के गांव नदी में समाते जा रहे हैं, तो वहीं खेत-जमीन भी कटकर नदी में समा रही है। अब तक 1062.82 लाख रुपये से अधिक फसलों को नुकसान हो चुका है, जिससे किसानों को तगड़ा झटका लगा है। इसके अलावा दूसरा झटका भी किसानों के लिए तबाह करने वाला है, क्योंकि 961 हेक्टेयर जमीन कटान से नदी में समा चुकी है।
बाढ़ से अब तक 188 गांव प्रभावित हो चुके हैं, जिनमें 31 गांव कटान की जद में आ चुके हैं। 46 गांव ऐसे हैं, जिनमें आबादी और कृषि दोनों प्रभावित हुए हैं। 15 गांवों के तो संपर्क मार्ग कट चुके हैं। अब तक 93417 लोग बाढ़-कटान से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से चारों तहसीलों में 9652 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है, जिसमें 7835 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगी फसलों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 961.983 हेक्टेयर जमीन कटने से हजारों छोटे और बड़े किसान भूमिहीन हो गए हैं। इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं, तो वहीं 42 पक्के मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। जबकि 68 झोंपडिय़ा भी नष्ट हो गई हैैं।
17737 राशन किट बांटी गईं
जिला प्रशासन ने अब तक बाढ़ प्रभावितों को 17737 राशन किट बांटीं हैं। जबकि 41375 मीटर तिरपाल का वितरण किया गया है। इसके अलावा ग्रामीणों को ओआरएस पैकेट और क्लोरोक्वीन गोलियां बांटी गई हैं। बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए 40 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और 21 राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं। संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए 40 मेडिकल टीम भी गठित की गई हैं।
बाढ़-कटान से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा, जिसके लिए शासन से डिमांड की गई है। राहत-बचाव कार्य के लिए चार मोटर बोट लगाई गई हैं। एनडीआरएफ और फ्लड पीएसी की एक-एक टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में काम कर रही है।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम