रमियाबेहड़, ईसानगर और धौरहरा क्षेत्र में घाघरा और शारदा नदियों के रौद्र रूप की वजह से करीब 50 हजार की आबादी मुश्किल में है, ईसानगर की 10 ग्राम सभाएं टापू बन चुकी हैं। जलभराव से रास्ते बंद हो जाने पर यहां के लोग घरो में ही रहने को मजबूर है। प्रशासनिक अधिकारियों को भी पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही है।
नेपाल की काली नदी का पानी घाघरा और शारदा नदियों में पहुंच कर तहसील क्षेत्र के ईसानगर, रमियाबेहड़ और धौरहरा के सैकड़ों गांवों में तबाही मचाता है बीते 15 दिनों से क्षेत्र के ओझापुरवा, बेलागड़ी, कैरातीपुरवा, चकदहा, मिलिक, मूसेपुर, दुर्गापुर पड़री, सियापुर, सधुवापुर, सिकटिहा, पोखरा अचरौरा, रैनी सरगडा आदि ग्रामसभाओ में सभी ओर पानी है। घरों में पानी भरने से ग्रामीण परेशान हैं। गांव में एक दूसरे के घर तक जाने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
यहां बता दें बरसात आते ही इन गांवों के अलावा सबसे बुरा हाल लखीमपुर-बहराइच की सीमा पर बसी चार ग्रामसभाओं ओझापुरवा, बेलागड़ी, चकदहा, कैरातीपुरवा का होता है। इन ग्राम सभाओं में आज भी मूलभूत सुविधाओं सड़क, पुल का अभाव है। तीन दिशाओं से नदियों से घिरे इन गांवों में बाहरी ग्रामीण अपनी बेटे-बेटियों की शादी करने से भी कतराते हैं। इन ग्राम सभाओं की आबादी 20 हजार के आसपास है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के लोग बहराइच के मिहीपुरवा बाजार पर निर्भर हैं। बाढ़ के दौरान गांव में लोग एक तरह से कैद होकर रह जाते हैं। अति आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीणों को नाव के सहारे नदी पार करना पड़ती है। इस समय घाघरा नदी उफान पर हैं। ऐसे में लोग काफी परेशान हैं।
रैनी गांव के 27 परिवारों को मिला गृह अनुदान
शारदा नदी ने अबतक रैनी गांव के 44 घरों का वजूद मिटा कर लोगों को सड़क पर ला दिया है तो जद में 35 घर आ चुके हैं। प्रशासन ने अब इन गांव वालों को मदद पहुंचानी शुरू कर दी है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि तहसीलदार अनिल यादव ने सभी कटान पीड़ितों की सूची शासन को भेजी है जिसमें पहले कट चुके 27 परिवारों को गृह अनुदान और 14 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास की स्वीकृति मिल चुकी है। ऐसे में गृह अनुदान राशि उनके खातों में भेजी गई है। इसके अलावा 16 सौ परिवारों को राहत किट दी जा चुकी है।
बाढ़ का पानी घरों से लेकर खेतों तक भरा हुआ है, काफी दिक्कतें हैं, कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी अह तक हाल चाल तक जानने नही आया है।
-चंद्राना यादव निवासी ओझापुरवा
जान जोखिम में डालकर नदी पार करना पड़ता है। बाढ़ के दौरान जब नदी में ज्यादा पानी रहता है और कोई गंभीर बीमार हो जाता है तो अस्पताल ले जाने के लिए काफी दिक्कत होती है।
-सत्यपाल भार्गव निवासी बनटुकरा बेलागड़ी
गांव में घुटनों तक पानी भरा है, घरों में पानी भर जाने के वजह से बैठने तक कि जगह नही है। सरकार की तरफ से अब तक कोई सहायता नही मिली है, जिससे काफी परेशानी हो रही है, चारों तरफ पानी ही पानी है।
-रूपनारायण शुक्ला निवासी मूसेपुर
बाढ़ के दौरान जब चौतरफा अथाह पानी होता है तब प्रशासन यहां राहत सामग्री भी नहीं पहुंचा पाता। ग्रामीणों को आबादी से करीब 15 किलोमीटर दूर जलिमनगर पुल पर राहत किट लेने ले लिए बुलाया जाता है। जरूरतमंद कुछ रास्ता पानी में पैदल चलकर तो कुछ रास्ता नावों से पार करते हैं।
-राजेंद्र प्रताप यादव निवासी ओझापुरवा