धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। रैनी गांव में सोमवार रात छह और घर भूकटान के चलते शारदा नदी में समा गए। इस तरह अब तक इस गांव में 41 ग्रामीणों के घर नदी में समा चुके हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग ने अब तक बचाव कार्य शुरू नहीं किया है। एसडीएम ने कटान पीड़ितों को मुख्यमंत्री आवास दिलाने की बात कही है।
रैनी गांव में कटान कर रही शारदा नदी में गांव के सर्वेश कुमार, विनोद कुमार, विजय बहादुर, रोहित, राजकिशोर और रामसिंह के घर समा गए। इसके साथ ही इस गांव में नदी में समा चुके घरों की कुल संख्या 41 हो गई। वहीं बाढ़ खंड विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से अब भी नहीं जागा है और न ही रैनी गांव में कोई बचाव कार्य शुरू किया है। बता दें कि इस गांव में जाने आने के सभी रास्ते शारदा नदी की तेज धार में कट चुके हैं। लोगों को तहसील मुख्यालय जाने के लिए कमर तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन प्रशासन ने इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया हैै। कटान पीड़ितों के मुताबिक अब तक उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिल सकी है। इसके अलावा ईसानगर क्षेत्र के गांव ओझापुरवा, बंशीबेली, मिलिकगौड़ी, बनटुकरा आदि गांव अभी जलमग्न हैं।
रैनी गांव में मंगलवार को भी छह घरों के कटने की सूचना लेखपाल ने दी है। इस गांव की रोज मॉनीटरिंग कर रिपोर्ट शासन को भेज रहा हूं। सभी कटान पीड़ितों को गृह अनुदान मिलेगा। साथ ही जिनके घर कटे हैं उन्हें मुख्यमंत्री आवास भी दिए जाएंगे।
-एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा
सिंचाई विभाग की कोशिश नाकाम, कटान रोकने को लगे पर्कुपाइन बाढ़ के पानी में बहे
तिकुनियां इंडो-नेपाल बॉर्डर पर मोहाना नदी का कटान तेजी से जारी है। ग्राम इंद्रनगर रननगर में नदी तेजी से कटान कर रही है। सिंचाई विभाग द्वारा किए गए बंदोबस्त नदी की तेज धारा के आगे टिक नहीं सके, बल्कि तेज धार में बह गए हैं। कटान रोकने को इंदरनगर रननगर में 67 पर्कुपाइन लगाए गए थे, लेकिन इससे कटान नहीं थमा। इससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी है। ग्रामीणों ने कटान रोकने को मजबूत बंदोबस्त किए जाने की मांग की है। कटान के चलते ककरौला-एसएसबी कैंप मार्ग कट गया है, जिससे दोपहिया वाहनों का आवागमन ठप हो गया है।
एक सप्ताह पूर्व क्षेत्र का दौरा कर डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कटान रोकने के निर्देश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए थे। इसके चलते सिंचाई विभाग ने कटान वाली जगहों पर 67 पर्कुपाइन लगाकर कटान रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नदी की तेज धारा के चलते कोशिश नाकाम रही। तेज कटान में कुछ पर्कुपाइन बह गए हैं। ग्राम निवासी राकेश, इंदर सिंह, अवतार सिंह ने बताया कि विभाग को कटान रोकने के लिए ठोस बंदोबस्त करने होंगे तभी कोई फायदा होगा।
शारदा नदी के जलस्तर में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई है पर जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। नदी का पानी अब भी इमलिया फार्म और ठोकर नंबर एक को जाने वाले रास्ते पर भरा है। नदी बीते कई दिनों से बरूआ कलां और जंगल नंबर सात में लगातार कटान कर रही है। जिससे ग्रामीणों में हड़कंप है।
शारदा नदी का जलस्तर बीते कई दिनों से घट-बढ़ रहा है। सोमवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। मंगलवार को नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। जल आयोग के मुताबिक मंगलवार शाम चार बजे शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.100 सेमी से 43 सेमी ऊपर 154.530 सेमी था। नदी अभी फिलहाल स्थिर है लेकिन धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर से ग्रामीण काफी परेशान हैं। नदी कम होने पर कटान तेजी से होने लगता है। इमलिया फार्म और ठोकर नंबर एक बोझवा जाने वाले रास्ते पर अब भी पानी भरा हुआ है। यहां ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं। बरूआ कलां और जंगल नंबर सात में भी शारदा नदी बीते कई दिनों से लगातार कटान कर रही है। जिससे कई गांवों के ग्रामीणों में हड़कंप है।