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बाढ़ की चपेट में आकर दो गांव बने टापू, 1774 लोग प्रभावित

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लखीमपुर खीरी। शारदा और घाघरा नदियों से आई बाढ़ जलस्तर घटने से कुछ कम हुई है, लेकिन गोला तहसील क्षेत्र में बाढ़ के पानी में घिरने से दो गांव रूरा सुल्तानपुर और जंगल नंबर नौ का मजरा टापू में तब्दील हो गया है। गांवों के चारों ओर पानी भरा है, जिससे 1774 लोग प्रभावित हुए हैं। इनका संपर्क दूसरे गांवों से कट गया है।
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डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार को शारदा नदी का शारदा बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान से 44 सेमी कम रहा, जबकि घाघरा नदी के गिरिजा बैराज पर भी जलस्तर खतरे के निशान से 38 सेमी कम रहा। डीएम ने बताया कि बाढ़-कटान से अब तक 57 गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 1049.858 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें प्रभावित हुई हैं। गुरुवार को 65.28 लाख रुपये फसल क्षति का आंकलन किया गया है। एक पक्का मकान क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि 20 झोपड़ी बाढ़ से नष्ट हुई हैं। बाढ़ प्रभावितों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बरूआ कलां में गन्ने की फसल अपने आगोश में ले रही शारदा नदी
पलियाकलां शारदा नदी के जलस्तर में अब गिरावट आने लगी है। नदी धीरे-धीरे नीचे उतर रही है। उतरती हुई नदी बोझवा व मटैहिया गांव के ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। ग्रामीणों की बरूआ कलां में जमीनें हैं जिनमें गन्ना बोया हुआ है। नदी अब उनकी यह जमीन निगल रही है और गन्ने की फसल को तेजी से काट रही है, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप है। नदी गुरुवार को भी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर थी, लेकिन जलस्तर घट रहा था।
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बता दें कि बीते कई दिनों से नदी का जलस्तर घट-बढ़ रहा था, लेकिन अब नदी का जल स्तर निरंतर कम होते जा रहा है। जल आयोग के जेई दुर्गेश कुमार ने बताया कि गुरुवार को दोपहर तीन बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.100 सेमी से 30 सेमी ऊपर 154.400 सेमी था। बताया कि नदी का जलस्तर स्थिर है और इसमें गिरावट भी देखी जा रही है। उधर नदी का जलस्तर कम होने से बोझवा, मटैहिया ग्राम पंचायत के ग्रामीणों में अफरातफरी मची है। बोझवा व मटैहिया के महेश कुमार, प्रमोद कुमार, नन्हू, संतोष कुमार, लाल बहादुर, बगौरी समेत भारी संख्या में ग्रामीणों की जमीनें ठोकर नंबर एक के पास स्थित बरूआ कलां में पड़ती हैं। यहां पर नदी काफी तेजी से कटान कर रही है, जिससे इनकी बोई हुई गन्ने की फसल भी अब नदी में समाने लगी है। ग्रामीणों की मानें तो प्रशासन की तरफ से अभी तक निरीक्षण तक नहीं किया गया है और न ही उनकी फसल का मुआवजा दिलाने की बात कही गई है।
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