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महंगी सब्जियों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

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खीरी रोड पर सब्जी बेचती महिला। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कोरोनाकाल में ऐसा कोई वर्ग नहीं बचा, जिसकी आय प्रभावित न हुई हो। ऐसे में गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बढ़ती महंगाई में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। लोगों को भरोसा था कि जनजीवन बहाल होने के बाद सबकुछ सामान्य होने से आर्थिक दिक्कत दूर हो जाएगी। मगर, आसमान छूती महंगाई ने तमाम दिक्कत खड़ी कर दी हैं। पिछले कुछ दिन से खाने पीने की चीजों के बढ़ते दामों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। इसमें भी सब्जियों का हाल सबसे खराब है। आलू, टमाटर, कद्दू, लौकी, तोरई के रेट इतने बढ़ गए कि आम आदमी की थाली से ये सब्जियां दूर होने लगी हैं। बढ़ती महंगाई ने महिलाओं को परेशान कर दिया है। उनका कहना है कि महंगी सब्जी के कारण घर का बजट बिगड़ गया है। 30 रुपये किलो से कम में कोई सब्जी नहीं है। आलू 30 और 40 रुपये तो टमाटर 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि महंगाई के कारण दुकानदारी प्रभावित है। पहले लगभग हर व्यक्ति दो किलो आलू खरीदता था, लेकिन अब आधा या फिर एक किलो लेकर काम चला रहा है। यही हाल हर सब्जी का है। लोग आधा किलो या फिर 250 ग्राम से काम चला रहे हैं।
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सब्जियों के दाम एक नजर में
आलू- 40 नया, 30 पुराना, लौकी- 20, परवल-60, तुरई-30, कटहल-40, बंदगोभी-40, लोबिया-60, टमाटर-50, कद्दू-20, गोभी-80, बैगन-60, नींबू-80, हरी मिर्च-60, हरी धनिया-200
सब्जी के दाम आसमान पर हैं। इससे घर का बजट खड़बड़ा गया है। पहले लॉकडाउन और अब महंगाई ने परेशानी बढ़ा दी है।
800 से 1000 रुपये प्रति किलो बिका धरती का फूल
बरसात का मौसम शुरू होते ही जंगल में निकलने वाली सब्जियों की आवक शुरू हो गई है। जंगल में मिलने वाला धरती का फूल बाजार में आने लगा है। रविवार को शहर में धरती का फूल 800 से लेकर 1000 रुपये प्रति किलो बिका।
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