लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन के बाद तहसीलों और कचहरी में कामकाज ने तेजी पकड़ी है, जिससे कम कीमत वाले जैसे 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये कीमत वाले स्टांप की कालाबाजारी शुरू हो गई है। 10 रुपये वाले स्टांप को 20 रुपये में बेचा जा रहा है, जबकि 100 रुपये वाले स्टांप को 150, 500 कीमत वाले स्टांप को 700 रुपये में बेचा जा रहा है। वेंडरों (स्टांप विक्रेता) के हौसले इतने बुलंद है कि ग्राहकों के कालाबाजारी का विरोध करने पर उन्हें कहीं भी शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कहकर धमकाते भी हैं। अधिकारियों का दावा है कि कोषागार में कम कीमत वाले स्टांप की कमी नहीं है।
जनपद में कोषागार से स्टांप की आपूर्ति वेंडरों को होती है, जिसके बाद वेंडर ही तहसील और कचहरी में स्टांप की बिक्री करते हैं। नासिक से कानपुर होते हुए स्टांप की आपूर्ति फरवरी 2020 में हुई थी, जिसके बाद मार्च में लॉकडाउन हो जाने से अभी तक स्टांप की आपूर्ति कोषागार कार्यालय को नहीं मिल पाई है। सूत्र बताते हैं कि अचानक स्टांप की बिक्री बढ़ने से वेंडरों ने कालाबाजारी शुरू कर दी है, क्योंकि कोषागार के पास भी लॉकडाउन के बाद स्टांप की आपूर्ति नहीं पहुंची है। इसकी जानकारी वेंडरों को भी है, जिससे मौके का फायदा उठाते हुए वेंडर मोटी कमाई करने की फिराक में हैं। शहर के मोहल्ला संकटा देवी निवासी राहुल वाजपेयी ने इस मामले में डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। राहुल के मुताबिक वेंडर मनमाने रेट पर स्टांप बेच रहे हैं, जब इसका विरोध किया तो उल्टे धमकाते हुए कहते हैं कि कहीं भी शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसकी वजह भी वेंडर खुद ही बताते हैं कि कालाबाजारी की कमाई का हिस्सा ऊपर बैठे लोगों तक जाता है।
कोषागार में कम कीमत वाले स्टांप की कमी नहीं है, बल्कि 25 हजार कीमत वाले स्टांप स्टॉक में नहीं है। लॉकडाउन के बाद पहली आपूर्ति दो-तीन दिन में मिलने वाली है। इससे पहले फरवरी 2020 में स्टांप की आपूर्ति हुई थी।
-आनंद कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी
स्टांप की कमी नहीं है। यदि किसी वेंडर द्वारा स्टांप की कालाबाजारी किए जाने की शिकायत मिलती है, उसके खिलाफ जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर वेंडर का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
- अरुण कुमार सिंह, एडीएम