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प्लाईवुड और राइस मिलों को सरकार के प्रोत्साहन की जरूरत

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लखीमपुर खीरी। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का एलान किया, तब से उद्यमियों के बीच उद्योगों की बेहतरी की उम्मीद जागी है। मौजूदा कृृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस जनपद में प्लाईवुड, राइस मिल, खांडसारी उद्योग समेत ईंट उद्योग में अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध छह लाख से अधिक किसानों और मजदूरों से है। प्लाईवुड और राइस मिल इंडस्ट्री को प्रोत्साहन मिलने की तुरंत जरूरत है, जबकि खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहन देने से गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा।
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7680 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले इस जनपद की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 40 लाख से अधिक हैै। करीब 120 किमी लंबा इंडो-नेपाल बार्डर है, जिससे यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का व्यापार होता है। इंडस्ट्री उद्योग की स्थिति मजबूत करने के लिए अब तक जनपद में 127.68 एकड़ भूभाग पर तीन औद्योगिक आस्थान और एक इंडस्ट्रियल एरिया स्थापित किया जा चुका है, जिनमें 67 फैक्ट्रियां लगी हैं। इनमें ज्यादातर फैक्टरी कृषि और वन उपज आधारित हैैं, जिससे प्लाईवुड, राइस मिल, खांडसारी प्रमुख उद्योग हैं। इसके अलावा बेकरी और गुड़ जैसे कुटीर उद्योग भी अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैैं। राइस मिल इंडस्ट्री सरकार की नीतियों से हलकान हैं, जिससे कुछ सालों में आठ राइस मिलें बंद हो चुकी है। इसके अलावा चार बंदी की कगार हैं, जिससे इस उद्योग को भी आर्थिक पैकेज से राहत की दरकार हैै। लकड़ी से बनने वाला प्लाईवुड अभी प्रदेश स्तर पर ही संघर्ष कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय स्तर का ब्रांड बनाने के लिए उद्यमी भी राहत पाने की उम्मीद में हैं। क्योंकि एक प्लाईवुड फैक्टरी में 200 से 250 श्रमिक रोजगार पाते हैं। वहीं राइस मिलों में भी स्थिति ठीक होने पर सैकड़ों श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है।
यहां लगाईं औद्योगिक इकाईयां
पद में तीन स्थानों लखीमपुर (राजापुर), गोला गोकर्णनाथ और ओयल में औद्योगिक आस्थान स्थापित किए गए हैं। 20 एकड़ वाले राजापुर औद्योगिक आस्थान में 15 फैक्ट्रियां संचालित बताई जा रही हैं और एक बंद है। 5.18 एकड़ वाले गोला औद्योगिक आस्थान में और ओयल औद्योगिक आस्थान में तीन-तीन फैक्ट्रियां लगी हैं, लेकिन इनमें भी दो बंद पड़ी हैं। नई फैक्टियों के लिए कोई प्लॉट खाली नहीं हैं। ऐसे ही छाउछ में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) ने 100 एकड़ में इंडस्ट्रियल एरिया बनाया है, जिसमें इंडियन ऑयल का बॉटलिंग प्लांट स्थित है। इस एरिया में 144 उद्योगों के लिए प्लॉट बनाए गए, लेकिन मौजूदा समय 41 फैक्ट्रियां/इंडस्ट्री चालू हालत में हैं। चार बंद पड़ी हैं।
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आर्थिक पैकेज से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी प्रोत्साहन देने की बात प्रधानमंत्री ने कही है, जिससे प्लाईवुड उद्योग भी आशा रखता है। अभी प्रदेश स्तर पर प्लाईवुड का बाजार बन पाया है। सरकार से प्रोत्साहन मिले तो राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्वालिटी इंप्रूव कर सकते हैं।
-रमेश अग्रवाल, प्लाईवुड उद्यमी
धान का उत्पादन अच्छा होने से राइस मिलों को संजीवनी की आवश्यकता है। राइस मिलें काफी दयनीय स्थिति में हैं। ज्यादातर सरकारी खरीद के धान की कुटाई होती है, लेकिन अभी 40 साल पुरानी दर का हलिंग चार्ज दिया जाता है। इससे कई राइस मिलें बंद हो गईं। तीन फ्लोर मिल थीं, जिनमें दो बंद पड़ी हैैं।
-हुकुम चंद्र अग्रवाल, राइस मिलर्स
जनपद फैक्ट फाइल
चीनी मिलें 09
राइस मिलें 30
प्लाईवुड फैक्टरी 45
खांडसारी उद्योग 20
कोल्हू 200
ईंट भट्ठा 180
जनपद में लगे उद्योगों के सुधार के लिए पैकेज की आवश्यकता हैै। इससे कई बीमार पड़ी फैक्ट्रियां फिर से संचालित की जा सकती हैं। आधुनिकीकरण होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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-संजय सिंह, उपायुक्त उद्योग
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