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एक तरफ उठी डोली तो दूसरी तरफ ताई की अर्थी

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मोहम्मदी। बिटिया की शादी से घर में खुशी का माहौल था। बरात आने से पहले दुल्हन की ताई का देहांत हो गया। पल भर में खुशियां मातम में बदल गईं। परिवार वालों ने करुण क्रंदन के बीच जैसे तैसे बेटी के हाथ पीले किए। बेटी की डोली उठने के बाद ताई की अर्थी निकली। यह देख हर व्यक्ति की आंख नम हो गई।
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गांव गुलौली निवासी बेवा ओमवती ( 65) के पुत्र पंकज और अंशुमान दिल्ली में काम करते हैं। लॉकडाउन होने के कारण दोनों दिल्ली में ही फंसे थे। बेटों को लेकर ओमवती काफी परेशान थीं। रविवार सुबह उनकी अचानक तबियत बिगड़ गई और मौत हो गई। रविवार को ही ओमवती के देवर स्वर्गीय सुमनपाल की बेटी रोशनी की बरात भी आनी थी। परिवार असमंजस में था कि घर में बड़ी मां (ताई) की लाश पड़ी थी। बरात दरवाजे पर आ चुकी थी। इसी बीच परिवार ने पुरोहितों से सलाह ली। इसके बाद रविवार को शादी संपन्न कराने और अगले दिन बड़ी मां के अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। रविवार को बेटी सुमन की शादी गमगीन माहौल में संपन्न कराई। सात फेरे लेने के बाद सोमवार सुबह जब विदाई होने को हुई तो बेटी रोशनी बदहवास हो उठी। अपनी बड़ी मां को निहारते हुए डोली में बैठ गई। बेटी की विदाई के बाद परिजनों ने बड़ी मां की जब अर्थी उठाई तो सभी लोग फफक कर रो पड़े। शायद ईश्वर को यही मंजूर था। काफी दिनों से बेटी की शादी की लालसा रखे बड़ी मां शादी से पहले चल बसी।
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