गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए गेहूं बेचने की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब ऑनलाइन पंजीकरण के बाद सत्यापन और उसके बाद टोकन मिलने पर निर्धारित तिथि पर किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकते हैं।
कृषि उत्पादन मंडी समिति में पीसीएफ के तीन, आरएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम के दो-दो, एफसीआई और एसएफसी का एक एक सेंटर सहित 10 क्रय केंद्र हैं, जहां 15 से 17 अप्रैल तक 1644.50 क्विंटल गेहूं खरीद हुई है। सचिव ब्रजभान सिंह और केंद्र प्रभारियों ने बताया कि नई प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है उसके बाद तहसील से नाम, गाटा, रकबा का सत्यापन होने के बाद टोकन जारी होने पर किसान निर्धारित तिथि पर किसी भी क्रय केंद्र पर अपनी उपज बेच सकता है। इस प्रक्रिया से किसानों को अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ता और मंडी में भीड़, बिचौलियों की समस्या दूर हो गई है।
ठेकेदार निर्धारित न होने पर किसानों के सहयोग से कर रहे खरीद
मंडी समिति में आरएफसी के दो केंद्र हैं। केंद्र प्रभारी धर्मराज और ब्रजेश सिंह ने बताया कि खरीद शुरू होने से पहले ही ठेकेदार निर्धारित होने चाहिए थे जबकि आरफसी के किसी भी केंद्र पर अब तक हैंडलिंग, परिवहन का कोई ठेकेदार निर्धारित नहीं है। बिना ठेकेदार किसानों के सहयोग से ही तौल करानी पड़ रही है। जबकि आरएफसी गेहूं खरीदने की नोडल संस्था है।
गेहूं क्रय केंद्र का निरीक्षण कर एसडीएम ने दिए दिशा-निर्देश
लॉकडाउन के बीच 15 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है। मंडी समिति में एचएफसी क्रय केंद्र पर खरीद धीमी गति से शुरू हो गई है और किसान भी आने लगे हैं। शनिवार को केंद्र पर पहुंची एसडीएम पूजा यादव ने किसानों से मास्क लगाकर आने के लिए कहा। क्रय केंद्र पर किस तरीके से तौल हो रही है उसके बारे में पूछताछ की। इस दौरान गोदाम प्रभारी जसवंत सिंह समेत अन्य कई किसान मौजूद रहे।