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भुगतान न मिलने से गन्ना किसान परेशान

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लखीमपुर खीरी। कोरोना से जंग को लेकर देश में लॉकडाउन चल रहा है। शासन और प्रशासन भी पूरी तरह कोरोना से बचाव के इंतजामों में जुटा है। वहीं चीनी मिलों के मालिक पूरी तरह निरंकुश हो गए हैं, जो गन्ना किसानों का भुगतान करने के बजाय अरबों की रकम दबाये बैठे हैं। इससे जुड़े मजदूरों के परिवारों का खर्च गन्ना बेचने से मिलने वाली रकम से चलता है, लेकिन नौ चीनी मिलों पर 22 अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया हो चुका है। इसमें सिर्फ चार मिलों गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिल ने 17 अरब 50 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य दबा रखा है।
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जनपद में नौ चीनी मिलें गन्ने की पेराई कर रहीं हैं, जिनका पेराई सत्र समापन की ओर है। कुछ मिलें अप्रैल में पेराई बंद कर देंगी, तो शेष अन्य मिलें भी मई के पहले पखवाड़े तक बंद हो जाएंगी। गन्ना किसानों को भुगतान के मामले में बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और एडवंट्ज ग्रुप की ऐरा मिल के मालिकान मनमानी कर रहे हैं। समय से किसानों को भुगतान करना तो दूर, कुल बकाया गन्ना मूल्य का 10 फीसदी भुगतान तक नहीं किया है। गोला ने 9.05, पलिया ने 2.59, खंभारखेड़ा ने 7.52 और ऐरा ने 3.62 फीसदी भुगतान किया है। इससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और कब तक भुगतान मिलेगा इस पर भी बड़ा संकट बना हुआ है। इसके अलावा अजबापुर मिल ने 78.13, कुंभी ने 77.88, गुलरिया ने 77.08, बेलरायां ने 57.03 और संपूर्णानगर ने 45.44 फीसदी भुगतान किया है।
गन्ना किसानों को जल्द भुगतान कराने के लिए चीनी मिलों पर दबाव बनाया जा रहा है। नोटिस देकर चेतावनी दी गई हैं। लॉॅकडाउन के चलते चीनी बिक्री में गिरावट आई है, लेकिन किसानों का भुगतान कराना पहला प्राथमिकता है।
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- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
लॉकडाउन के चलते चीनी की डिमांड नहीं हो रही है। शीरा की बिक्री बंद है। इससे भुगतान करने में दिक्कत आ रही हैं।
- एनसी अग्रवाल, यूनिट हेड, खंभारखेड़ा मिल
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